भारत का मुझे चीन समर्थक मानना गलत : प्रचंड
करीब नौ महीने तक नेपाल के प्रधानमंत्री रहने के बाद मई में पद से इस्तीफा देने वाले प्रचंड ने कहा कि वह नेपाल के दोनों पड़ोसियों भारत और चीन के साथ अच्छे संबंध चाहते हैं।
मंगलवार को बीबीसी लंदन को दिए एक साक्षात्कार में प्रचंड ने स्वीकार किया कि वर्ष 2005 में नेपाल के राजा ज्ञानेंद्र के सत्ता पर सीधे कब्जे के बाद भारत ने माओवादियों और अन्य राजनीतिक दलों के बीच वार्ता का समर्थन किया था।
ब्रिटिश राजधानी के निजी दौरे पर पहुंचे प्रचंड ने कहा कि चुनाव में उनकी पार्टी के सबसे बड़े दल के रूप में उभरने और अगस्त 2008 में उनके प्रधानमंत्री बनने के बाद से नई दिल्ली और माओवादियों के बीच संबंधों की गरमाहट समाप्त हो गई।
बीबीसी ने कहा कि प्रचंड ने दक्षिण एशिया में अमेरिका के बढ़ते प्रभाव को समाप्त करने के लिए भारत, चीन और नेपाल की एकीकृत सुरक्षा रणनीति की भी वकालत की।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


Click it and Unblock the Notifications