स्वाइन फ्लू का टीका बनाने की दौड़ में पुणे का संस्थान भी
देश में स्वाइन फ्लू से अब तक 15 मौतें हो चुकी हैं और सबसे पहली मौत पुणे में ही हुई थी।
मेक्सिको के वेराक्रुज के समीप एक छोटे से गांव में 12 अप्रैल को एच1एन1 वायरस का पहली बार पता चलने के कुछ हफ्ते बाद से ही पुणे में उसके टीके के विकास का काम आरंभ हो गया था।
सीरम इंस्टीट्यूट के कार्यकारी निदेशक सुरेश एस.जाधव ने कहा कि गर्मियों में तापमान बढ़ने के बावजूद वायरस का संक्रमण रूका नहीं है। अध्ययनों से पता चला है कि वर्ष 1975 के बाद पैदा हुए लोगों को इसके संक्रमण का खतरा अधिक है क्योंकि उनका प्रतिरोधी तंत्र एच1एन1 वायरस की पहचान करने में अक्षम है।
साइबर मीडिया समूह द्वारा लाई गई 109 वर्ष पुरानी पत्रिका 'टेक्न ोलॉजी रिव्यू' के भारतीय संस्करण के अनुसार यद्यपि सीरम इंस्टीट्यूट मौसमी इंफ्लुएंजा का टीका नहीं बनाता, इसके बावजूद विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने इस चुनौती का सामना करने के लिए भारत से उसे चुना।
सीरम के अलावा भारत की दो अन्य कंपनियां-नई दिल्ली स्थित पनाशिया बायोटेक और हैदराबाद स्थित भारत बायोटेक भी स्वाइन फ्लू का टीका बनाने का प्रयास कर रही हैं।
डब्ल्यूएचओ की शर्तो के अनुसार सीरम इंस्टीट्यूट स्वाइन फ्लू के कुल टीका उत्पादन का 10 प्रतिशत हिस्सा विदेशों को उपलब्ध कराएगा।
संस्थान के वैज्ञानिकों का कहना है कि स्वाइन फ्लू का पहला टीका सितम्बर में तैयार हो जाएगा। कम से कम 25 स्वयंसेवकों पर इसके परीक्षण की तैयारियां भी जारी हैं।
परंतु पत्रिका के अनुसार टीका बाजार में आने में अभी छह महीने का समय लगेगा।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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