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स्वाइन फ्लू से अबतक 8 मौतें

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Swine Flu
नई दिल्ली। भारत में स्वाइन फ़्लू से मरने वालों की संख्या बढ़कर आठ हो गई है. सोमवार देर शाम पुणे में एक 13 वर्षीय बच्ची की मौत हो गई.इस तरह से पुणे में स्वाइन फ़्लू से अब तक पांच लोगों की मौत हो चुकी है.पुणे में दहशत का माहौल है और सभी स्कूल और कॉलेज सात दिनों के लिए बंद कर दिए गए हैं.

साथ ही तीन दिनों के लिए सभी सिनेमाघरों को बंद करने के आदेश दिए गए हैं. प्रशासन ने लोगों से कहा कि वे भीड़भाड़ वाले इलाक़ों में न जाएं और अपने घरों में ही रहें.

मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए अस्पतालों में 10 नए आईसीयू केंद्र और नए केंद्र खोले गए हैं. सोमवार को देश में स्वाइन फ़्लू के बढ़ते मामलों के बीच केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ग़ुलाम नबी आज़ाद ने कैबिनेट सचिव केएम चंद्रशेखर के साथ स्थिति की समीक्षा की. स्वास्थ्य सचिव नरेश दयाल भी इस बैठक में शामिल हुए.

बैठक के बाद स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि पहले देशभर में स्वाइन फ़्लू के सिर्फ़ दो ही केंद्र थे लेकिन अब इनकी संख्या बढ़ाकर 18 कर दी गई है.दवाओं के बारे में उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार अपने पास दो करोड़ टैमीफ़्लू टैबलेट का भंडार रखेगी और ज़रूरत के हिसाब से इसे राज्यों के पास भेजेगी.

स्कूल-कॉलेजों को बंद करने के बारे में उन्होंने कहा कि ये समस्या का समाधान नहीं, लेकिन उन्होंने सलाह दी कि स्वाइन फ़्लू के लक्षण वाले बच्चे स्कूल न जाएँ. सरकारी आँकड़ों के अनुसार अब तक देशभर में स्वाइन फ़्लू के 959 मामले सामने आए हैं और इनमें से 563 को इलाज के बाद छुट्टी दे दी गई.

स्कूल बंद

दूसरी ओर स्वाइन फ़्लू से सबसे ज़्यादा प्रभावित महाराष्ट्र के पुणे शहर के सभी स्कूलों और कॉलेजों को बंद करने का आदेश दिया गया है.महाराष्ट्र सरकार के एक वरिष्ठ मंत्री अजित पवार ने पत्रकारों को यह जानकारी दी. उन्होंने कहा, "पुणे और पड़ोसी पिम्परी चिंचवाड में सभी स्कूल, कॉलेज और कोचिंग संस्थाएँ सात दिनों तक बंद रहेंगी. हम दीपावली की छुट्टियाँ कम करके इसकी भरपाई करेंगे."

अजित पवार

अजित पवार ने स्कूल और कॉलेज प्रशासन को ये निर्देश दिया कि इन सात दिनों में वे अपनी-अपनी संस्थाओं को वायरस मुक्त करने की कोशिश करें. पुणे में एच1एन1 वायरस से लोगों के मारे जाने पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि अगर लोगों का समय पर इलाज होता, तो उन्हें बचाया जा सकता था.

आंध्र प्रदेश सरकार ने भी इस बीमारी से निपटने लिए चौकसी बढ़ा दी है.सरकार ने रेलवे स्टेशनों और बस अड्डों पर सहायता केंद्र खोले हैं ताकि मुंबई और पुणे से आने वाले यात्रियों और संक्रमित लोगों की पहचान की जा सके.राज्य के स्वास्थ्य मंत्री दमन नागेंद्र का कहना है कि स्वाइन फ़्लू से निपटने के लिए तमाम एहतियाती क़दम उठाए गए हैं इसलिए घबराने की ज़रूरत नहीं है.

उन्होंने कहा, "राज्य में अब तक स्वाइन फ़्लू के 74 मामले सामने आए हैं जिनमें 72 को पूरी तरह से ठीक करके अस्पताल से छु्ट्टी दी जा चुकी है. सिर्फ़ दो लोगों का इलाज चल रहा है. यहाँ स्थिति पूरी तरह से नियंत्रण में है."

संक्रमण का भय

भारत में स्वाइन फ़्लू के बढ़ते मामलों में से अधिकतर ऐसे हैं जिन्हें किसी दूसरे व्यक्ति से यहीं रहते हुए संक्रमण मिला है. अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डों पर लगातार इस बात की जांच की जा रही है कि कहीं संक्रमित व्यक्ति दूसरे देशों से संक्रमण लेकर भारत तो नहीं आ रहे.

पर अबतक जो मामले सामने आए हैं उनमें से अधिकतर ऐसे हैं जिन्हें किसी मित्र, सार्वजनिक स्थान पर आने वाले लोगों या स्कूलों जैसी जगहों से संक्रमण मिला है.

इसे लेकर जहाँ माता-पिता अपने बच्चों में संक्रमण के ख़तरे के प्रति चिंतित हैं, वहीं पर्यटकों, विदेशों से आ रहे लोगों को लेकर भी और गंभीर होने की ज़रूरत बताई जा रही है.

स्वाइन फ़्लू का सबसे ज़्यादा असर दिखाई दे रहा है पश्चिमी देशों में. अमरीका और यूरोप के कुछ देश इससे सर्वाधिक प्रभावित हुए हैं. भारत में स्थिति उतनी चिंताजनक नहीं है जितनी कि इन देशों में, पर आगे के खतरे के प्रति गंभीर होने की ज़रूरत पर बल दिया जा रहा है.

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