अब रेलगाड़ी गोद लेंगे अधिकारी

रेलगाड़ियों को गोद लेने वाले अधिकारी उसके समय से चलने, रेलगाड़ी में दिए जा रहे खाने की गुणवत्ता, डिब्बों की हालत, सफाई के स्तर को सुनिश्चित करने के साथ ही यात्रियों की शिकायतों को सुनने का भी काम करेंगे।
उत्तर रेलवे के प्रवक्ता आनंद स्वरूप ने बताया,"यह पहल उत्तर रेलवे की दिल्ली डिवीजन ने की है। हमारे पास विभिन्न विभागों के 150 अधिकारियों का एक दल है जो इस कार्य के लिए इच्छुक है।"
सेवा स्तर में सुधार
इस महीने आरंभ किए गए कार्यक्रम का उद्देश्य अधिकारियों की जिम्मेदारी और जवाबदेही बढ़ाना है।
अधिकारियों को जिस स्टेशन या रेलगाड़ी की जिम्मेदारी दी जाएगी, उन्हें उसके कर्मचारियों से सवाल करने की पूरी छूट होगी। सेवा स्तर में सुधार के लिए उसे मासिक या द्विमासिक रिपोर्ट क्षेत्रीय प्रबंधक को सौंपनी होगी।
इस प्रकार की पहली रिपोर्ट अगस्त में आने की उम्मीद है। स्वरूप ने बताया,"प्रत्येक अधिकारी एक स्टेशन या रेलगाड़ी या दोनों गोद ले सकता है। वह स्टेशन का औचक निरीक्षण कर पेयजल और बेचे जा रहे खाद्य पदार्थो की गुणवत्ता, प्रतीक्षालयों और शौचालयों की स्थिति, सुरक्षा इंतजामों तथा यात्रियों को उपलब्ध होने वाली सभी सुविधाओं की जांच कर सकता है।"
लंबी दूरी की गाड़ियां
इस पहल के तहत राजधानी,शताब्दी और अन्य लंबी दूरी की कुल 45 रेलगाड़ियों और दिल्ली डिवीजन के स्टेशनों को शामिल किया गया है।इस योजना का विस्तार शीघ्र ही देश में भारतीय रेलवे की अन्य डिविजनों में भी किया जाएगा।
डिविजनल रेल प्रबंधक बी.डी.गर्ग ने कहा कि इस योजना को काम-काज में सुधार और कर्मचारियों की निजी हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है।
अधिकारियों के अनुसार यात्रियों की सुविधाओं में सुधार के लिए रेल मंत्री ममता बनर्जी से जोनल रेल अधिकारियों को पूरी छूट मिलने के बाद यह पहल की गई है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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