सू की को 18 महीने की सजा (लीड-1)
समाचार एजेंसी डीपीए के अनुसार इंसेन जेल में एक विशेष अदालत ने सू की को नजरबंदी की सजा के उल्लंघन का दोषी करार दिया। सू की ने झील के किनारे स्थित अपने आवास में गत तीन मई को एक अमेरिकी नागरिक को प्रवेश करने की अनुमति प्रदान की थी।
अदालत ने सू की के दो घरेलू सहायकों को भी दोषी करार देते हुए उन्हें भी तीन वर्ष के कारावास की सजा सुनाई। अदालत ने अमेरिकी नागरिक जॉन विलियम येत्ता को भी वीजा उल्लंघन तथा बिना अनुमति इन्या झील में तैरने के लिए सात वर्ष के कारावास की सजा सुनाई।
अदालत द्वारा फैसला सुनाए जाने के तत्काल बाद म्यांमार के गृह मंत्री मौंग मौंग ऊ ने घोषणा की कि थान श्वे ने सू की की सजा को डेढ़ वर्ष की नजरबंदी में तब्दील करने का निर्णय लिया है।
एक बयान में थान श्वे ने कहा कि उन्होंने सू की सजा को इसलिए हल्का कर दिया है, क्योंकि वह म्यांमार की आजादी के नायक जनरल आंग सान की बेटी हैं।
18 महीने की नजरबंदी से यह साफ हो गया है कि सू की अगले वर्ष म्यांमार में होने वाले आम चुनाव के दौरान आजाद नहीं रहेंगी।
थान श्वे ने अपने संदेश में कहा, "मुझे मुकदमे के बारे में बहुत बुरा लगा, लेकिन मैं कानूनी प्रक्रिया में हस्तक्षेप नहीं करना चाहता था।"
थैन श्वे ने सू की की नजरबंदी के लिए कई शर्ते निर्धारित की हैं। इन शर्तो के तहत उन्हें घर के अंदर बने रहना होगा, लेकिन उन्हें पत्र लिखने और सरकारी टीवी देखने की छूट होगी। थैन श्वे ने कहा है कि यदि सू की ने इन शर्तो का पालन किया तो उन्हें जल्द ही माफी भी प्रदान की जा सकती है।
थैन श्वे ने सू की के दो घरेलू सहायकों की सजा को भी घटा कर 18 महीने की कर दी है।
बहरहाल, सू की के खिलाफ नए आरोप मढ़ने के लिए म्यांमार की सैन्य सरकार की व्यापक पैमाने पर निंदा हुई है।
अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने इसे एक 'दिखावटी सुनवाई' करार दिया है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने चेतवानी दी है कि सू की और अन्य राजनीतिक बंदियों की रिहाई बगैर वर्ष 2010 में होने वाले म्यांमार के आम चुनाव की कोई विश्वसनीयता नहीं होगी।
लेकिन म्यांमार के सैन्य नेताओं को इस बात का डर है कि यदि सू की को आजाद कर दिया गया तो वह उनके सुनियोजित चुनाव के परिणामों को प्रभावित कर सकती हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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