विदेश मंत्रालय में बही बदलाव की बयार
मनीष चांद
नई दिल्ली, 11 अगस्त (आईएएनएस)। विदेश मंत्रालय में इन दिनों बदलाव की बयार बह रही है। मंत्रालय ने प्रशिक्षण व विशेषज्ञता को अपना नया मंत्र बनाते हुए इसे अधिकारियों को प्रौन्नत करने का आधार भी बनाया है।
वैश्विक कूटनीति और अन्य देशों से संबंधों को बेहतर बनाने वाले भारतीय विदेश सेवा (आईएफएस) के अधिकारियों को प्रशिक्षण और विशेषज्ञता संबंधी प्रदर्शनों के आधार पर अब प्रोन्नत किया जाएगा न कि उम्र के आधार पर। इसके लिए इन अधिकारियों को पहले खुद को साबित भी करना होगा।
दुनिया में आर्थिक कूटनीति की बढ़ती चुनौतियों के मद्देनजर संयुक्त सचिव स्तरीय 30 कूटनीतिज्ञों जिन्हें प्रोन्नत किया जाना है, को हैदराबाद स्थित देश के शीर्ष बिजनेस स्कूल इंडियन स्कूल ऑफ बिसनेस भेजा गया है।
इन कूटनीतिज्ञों को देश की विदेश नीति से जुड़े विभिन्न पहलूओं पर अध्ययन करने के बाद एक शोध पत्र तैयार करने को कहा गया है।
पाकिस्तान में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के विशेष दूत के रूप में कार्यरत सतिंदर लांबा के एक प्रस्ताव पर विदेश मंत्रालय में बदलाव की यह बयार दिख रही है।
लांबा ने विदेश मंत्रालय के विभिन्न विभागों व डिविजनों का पुनर्गठन किए जाने का प्रस्ताव रखा था।
लांबा ने आईएएनएस से कहा, "सेवाओं का पुनर्गठन जरुरी है। इसकी शुरुआत भी हो चुकी है।"
पूर्व विदेश सचिव शिवशंकर मेनन की जगह विदेश सचिव के पद पर नियुक्त हुई निरुपमा राव ने पदभार ग्रहण करते ही इस बदलाव का संकेत दिया था। उन्होंने कहा था वैश्विक चुनौतियों को देखते हुए देश की कूटनीतिक क्षमताओं का विस्तार किया जाना चाहिए।
हाल ही में अमेरिकी रणनीतिकार और विशेषज्ञ डेनियल मार्के ने एक लेख के जरिए देश की कूटनीतिक संस्थाओं की कार्यप्रणाली की आलोचना की थी।
'विकासशील भारत की विदेश नीति का सॉफ्टवेयर' नामक शीर्षक से उन्होंने अपने लेख में कहा था, "विदेश नीति के मामलों में मलेशिया जैसे देशों के लिए आईएफएस अधिकारियों की भूमिका अहम हो सकती है लेकिन विकासशील देशों के साथ ऐसा नहीं है। ब्राजील जैसे देश में 1197 कूटनीतिज्ञ हैं। इसी प्रकार अमेरिका में 19,667, जर्मनी में 3250, इंग्लैंड में 3600 कूटनीतिज्ञ हैं। जबकि भारत में सिर्फ 669 कूटनीतिज्ञ ही हैं।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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