म्यांमार के खिलाफ हथियार प्रतिबंध की मांग

लंदन स्थित बर्मा कैंपेन की ओर से कहा गया है, "तानाशाही अगले वर्ष के चुनाव में धांधली करने के लिए लोकतंत्र समर्थक सभी जुबानों को बंद करना चाहती है।"

बर्मा कैंपेन की ओर से कहा गया है, "आंग सान सू की के मुकदमे ने वैश्विक स्तर पर विरोध के स्वर को भड़काया है। ब्रिटिश प्रधानमंत्री गार्डन ब्राउन, अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा और संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने म्यांमार सरकार की इस कार्रवाई की निंदा की है।"

संगठन की ओर से कहा गया है, "अब हमें निंदा के उन शब्दों को वास्तविक दबाव में परिवर्तित करने की आवश्यकता है। हम म्यांमार के खिलाफ एक वैश्विक हथियार प्रतिबंध की मांग करते हैं।"

संगठन की ओर से आगे कहा गया है, "वैश्विक हथियार प्रतिबंध से म्यांमार की तानाशाही की पहुंच नए हथियारों और हथियारों की नई प्रौद्योगिकी तक नहीं हो पाएगी, परिणामस्वरूप वहां मानवाधिकारों के उल्लंघन के मामलों में कमी आएगी। यह कदम तानाशाही के लिए एक बड़ा मानसिक झटका भी होगा।"

वैसे तो म्यांमार ने छोटे पैमाने पर अपने हथियार, गोला-बारूद खुद से बनाने शुरू कर दिए हैं, लेकिन चीन और रूस अभी भी उसके लिए आधुनिक हथियारों के सबसे बड़े आपूर्तिकर्ता बने हुए हैं।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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