मुखर्जी ने कहा, सूखे से घबराने की जरूरत नहीं (लीड-1)

आयकर प्रशासन के अधिकारियों के एक वार्षिक सम्मेलन के मौके पर मुखर्जी ने पत्रकारों से बातचीत में कहा, "161 जिलों को सूखा प्रभावित घोषित किया गया है। जहां तक बुआई की बात है तो इसमें 20 फीसदी की कमी आई है।"

उन्होंने सूखे की स्थिति पर सचेत करते हुए कहा, "मानसून की स्थिति अब भी ठीक नहीं है, लेकिन घबराने की कोई जरूरत नहीं है। लेकिन अगर आप सूखा-सूखा चिल्लाएंगे तो इसका नकारात्मक असर होगा।"

मुखर्जी ने कहा कि पंजाब व हरियाणा यहां तक कि बिहार और उत्तर प्रदेश में भी पानी की कमी है। खाद्यान उत्पादन की दृष्टि से पंजाब व हरियाण दो महत्वपूर्ण राज्य हैं और यहां सिंचाई के लिए भूजल का भरपूर इस्तेमाल किया जाता है।

भारत मौसम विभाग के अनुसार देश की 60 फीसदी खेती जून से सिंतबर के बीच होने वाली बारिश पर निर्भर है लेकिन इस साल पिछले आठ दशक की सबसे गंभीर स्थिति दिख रही है।

विभाग के मुताबिक एक जून से पांच अगस्त के बीच मानसूनी बारिस में 25 फीसदी की कमी दर्ज की गई और यह कमी पंजाब और हरियाणा जैसे राज्यों में और ज्यादा है।

मुखर्जी ने खाद्यानों के आयात, निर्यात पर लगातार प्रतिबंध और सरकारी एजेंसियों से खुले बाजार से ज्यादा अनाज खरीदने को कहने जैसे कदम उठाने की ओर संकेत करते हुए कहा, "हमारे पास आपात योजनाएं हैं।"

सूखे की आहट ने पहले ही जरूरी चीजों की कीमतों को आसमान पर पहुंचा दिया है। अरहर की दाल कई राज्यों में 100 रुपये प्रति किलो बिक रही है।

आपात कदम उठाने के बारे में वित्त सचिव अशोक चावला ने कहा कि विभिन्न राज्यों से समीक्षा रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद इस बारे में फैसला लिया जाएगा।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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