न्यायाधीशों को नजरबंद करने के मामले में मुशर्रफ के खिलाफ मामला दर्ज
अखबार द न्यूज के मुताबिक पाकिस्तान के इतिहास में यह एक अप्रत्याशित घटना है। दस घटना के बाद संभावना है कि मुशर्रफ को या तो जेल जाना पड़े या स्थायी तौर पर देश के बाहर रहना पड़े या फिर निर्वासन झेलना पड़ सकता है।
अखबार के मुताबिक यह मुशर्रफ के लिए बहुत बड़ा झटका है। मुशर्रफ ने ही कहा था कि वह कभी भी पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ और दिवंगत बेनजीर भुट्टो का निर्वासन खत्म नहीं होने देंगे और उन्हें पाकिस्तान वापस नहीं आने देंगे। अब खुद मुशर्रफ के लिए वही परिस्थियां पैदा हो गई है।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश मोहम्मद अकमल खान द्वारा सोमवार को जारी आदेश के बाद इस्लामाबाद की पुलिस ने पाकिस्तान दंड संहिता की धारा 344/34 के तहत मुशर्रफ के खिलाफ 10 अगस्त को प्राथमिकी दर्ज की।
प्राथमिकी में यह उल्लेख किया गया है कि मुशर्रफ और अन्य ने सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों, उनके परिवार के सदस्यों को नजरबंद किया। इस दौरान उनके बच्चों को न तो स्कूल जाने दिया गया और न ही परीक्षाओं में उपस्थित होने दिया गया।
मोहम्मद असलम घुमान नामक एक वकील ने मुशर्रफ द्वारा जजों को नजरबंद करने का आदेश देने के मामले में उनके खिलाफ याचिका दायर की थी और कार्रवाई की मांग की थी।
सूत्रों के मुताबिक घुमान ने लगभग डेढ़ महीने पहले यह याचिका दायर की थी। बार-बार याचिका की याद दिलाने के बाद भी कानून विभाग इसे नजरअंदाज करता रहा।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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