स्वाइन फ्लूः घबराएं नहीं इसे जानें

Swine flu precautions
पिछले दिनों भारत में स्वाइन फ्लू से हुई शुरुआती मौतों की खबर मीडिया में छाई रही। इसमें कोई शक नहीं कि हालात चिंताजनक हैं। मगर किसी भी संकट से निपटने का उपाय है, उसके बारे में अधिक से अधिक जानकारी हासिल करना। लिहाजा स्वाइन फ्लू से जुड़ी कुछ ऐसी सुचनाओं और तथ्यों पर निगाह डालते हैं, जिनके बारे में हर कोई जानना चाहता है।

बुनियादी जानकारी

नामः स्वाइन फ्लू, एसआईवी, एच-वन एन-वन, इन्फ्ल्यूएंजा-ए

स्वाइन फ्लू के पीछे दरअसल एच-वन एन-वन नामक एक नया वायरस है, जो अब तक मेडिकल साइंस के लिए अज्ञात था।

अमेरिका से उपलब्ध आंकड़ों को अगर देखे तो वहां हजार में से एक व्यक्ति इस वायरस से संक्रमित है। अमेरिका में इस संक्रमण के सबसे ज्यादा पाए जाने की सूचना है। इनमें वो लोग भी शामिल हैं जो बिना किसी मेडिकल ट्रीटमेंट के ठीक हो गए।

यह कैसे फैलता है?

स्वाइन फ्लू ठीक उसी तरह से फैलता है जैसे कि मौसमी इन्फ्ल्यूएंजा का संक्रमण लोगों को प्रभावित करता है। प्रभावित लोगों में उपरी तौर पर खांसी और छींक जैसे लक्षण भी दिखते हैं।

संक्रमित वस्तुओं को छूने और फिर नाक या मुंह को छूने से व्यक्ति संक्रमित हो सकता है।

यह मनुष्य से मनुष्य में फैलता है। पकाया हूआ सूअर का मांस खाने से यह नहीं फैलेगा क्योंकि स्वाइन फ्लू का वायरस खाने की वस्तुओं से नहीं फैलता।

स्वाइन फ्लू को पहचानें कैसे?

दरअसल स्वाइन फ्लू के ज्यादातर लक्षण आम फ्लू से मिलते-जुलते हैं। जैसे बुखार, कफ, गले मे सूजन, बदन में ऐंठन, सर दर्द, ठंड लगना और मांसपेशियों में दर्द।

यहां पर स्वाइन फ्लू से प्रभावित लोगों में मिलने वाले लक्षणों का प्रतिशत दिया गया है। इससे बीमारी की पहचान करने में आसानी होगी।

लक्षण

बुखारः 93%
खाँसीः 83%
सांस लेने में दिक्कतः 54%
थकान तथा कमजोरीः 40%
ठंडः 37%
गले में खराशः 31%
सिरदर्दः 31%
उल्टीः 29%
घरघराहटः 24%
दस्तः 24%

रोकथाम के उपाय

एक टीके को विकसित किए जाने की प्रक्रिया जारी है। उम्मीद है कि यह जल्दी ही उपलब्ध हो जाएगा। इनमें से कोई भी लक्षण दिखे तो सबसे पहले दूसरे लोगों को संपर्क में आने से बचना चाहिए और तत्काल जांच करानी चाहिए।

इलाज

आम तौर पर दी जाने वाली दवाओं से लक्षणों में आराम मिलता है पर वे वायरस को खत्म नहीं कर पाती हैं। ऐंटीवायरस दवाओं का इस्तेमाल स्वाइन फ्लू के इलाज में अथवा उसके इंफेक्शन की रोकथाम में हो सकता है। मगर ये दवाएं किसी अनुभवी चिकित्सक की निगरानी में ही ली जानी चाहिए।

उन व्यक्तियों पर इन्फ्लूएंजा एंटीवायरल ड्रग का भी इस्तेमाल किया जा सकता है, जो स्वाइन फ्लू से प्रभावित भले न हों मगर किसी कारणवश इससे संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में हैं।

फ्लू की रोकथाम में एंटीवायरल ड्रग 70 से 80 प्रतिशत तक कामयाब हैं। मगर रोकथाम के लिए इस दवा का कितने दिनों तक इस्तेमाल करना है, वह निजी स्तर पर उस व्यक्ति के स्वास्थ्य पर निर्भर करता है।

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