ऐसे तो लोग दाल खाना छोड़ देंगे!

Dal-roti
नई दिल्ली। कहा जाता है दाल सबसे ज्‍यादा पौष्टिक आहार है। इसमें प्रोटीन, मिनरल, आदि हैं, जिनसे शरीर का तेजी से विकास होता है। लेकिन ये क्‍या, लोग तो दाल खाना ही छोड़ रहे हैं। जी हां अनाज, फल और सब्जियों के दाम ऐसे आसमान छूए कि लोगों ने अपनी थाली में से दाल की सबसे ज्‍यादा कटौती की। ताजा अध्‍ययन यही कहता है कि आने वाले समय में लोग दाल खाना ही छोड़ देंगे। इसका कारण बढ़ती कीमत होगा।

जी हां आम आदमी की थाली से अरहर, मसूर, उड़द और मूंग आदि की दालें दूर होती जा रही है। पिछले एक साल में इनकी कीमत करीब दोगुने हो चुकी है। अभी भी कीमतों का पारा ऊपर ही चढ़ रहा है। अरहर की दाल 50 रुपए से बढकर 90 रूपये प्रति किलो हो गई। मसूर 70 रूपये और उड़द 60 रूपये प्रति किलो तक पहुंच चुकी है।

एसोचैम की ताजा रिपोर्ट

एसोसिएटेड चैम्बर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (एसोचैम) के एक अघ्ययन के मुताबिक 1960 के दशक में दाल की प्रति व्यक्ति खपत 27 किलोग्राम सालाना थी। यह जनवरी-जून 2009 में यह खपत घटकर 11 किलो से नीचे पहुंच गई है। इसके पीछे सबसे बडी वजह अरहर, मसूर, उडद जैसी आम उपभोग की दालों के आसमान छूते दाम है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले कई सालों से दालों की पैदावार बढा़ने के लिए गंभीर प्रयास नही किए गए। यहां तक कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन ने भी दालों को प्राथमिकता नही दी। मिशन के तहत गेहूं, चावल और मोटे अनाजों की पैदावार बढा़ने पर ही ध्‍यान दिया जाता है।

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