बगैर अवकाश के 1000 दिन तक ड्यूटी

इंदौर के चिकित्सा महाविद्यालय के चिकित्सक डॉ. वाजपेयी जिला चिकित्सालय में तैनात हैं। उन पर शव परीक्षण विभाग की जवाबदेही है। डॉ. वाजपेयी ने पिछले पौने तीन साल के दौरान बगैर अवकाश लिए अपनी इस जिम्मेदारी का बखूबी निर्वाह किया है। आमतौर पर चिकित्सक पोस्टमार्टम की ड्यूटी करना पसंद नहीं करते हैं, जबकि डॉ. वाजपेयी इसे सेवा भाव के तौर पर लेते हैं।
काम में समय का पता नहीं चलता
वाजपेयी ने कहा कि उन्हें काम करने का जुनून है। पौने तीन साल तक लगातार काम करने के पीछे उनका मकसद कोई रिकॉर्ड बनाना नहीं था। बल्कि वे अपने काम में इतने मस्त रहे कि उन्हें इस अवधि का पता ही नहीं चला।
डॉ. वाजपेयी ने 1000 कार्यअवधि के दौरान 2100 शवों का पोस्टमार्टम किया है। वह जिस शव का पोस्टमार्टम करते हैं उसकी रिपोर्ट भी तीन दिन में तैयार कर दी जाती है। गंभीर मामलों में तो वह पोस्टमार्टम के साथ ही रिपोर्ट दे देते हैं। डॉ. वाजपेयी के दो सहकर्मी गोपाल शिंदे और संतोष बनकर ने भी उनका साथ निभाया है तथा 1000 दिनों से उन दोनों ने भी कोई अवकाश नहीं लिया है।
डॉ. वाजपेयी बताते हैं कि इंदौर में हर साल 2200-2300 शवों के पोस्टमार्टम होते हैं। शहर में दो स्थानों पर पोस्टमार्टम की व्यवस्था की गई है। एम.वाई. अस्पताल के अलावा जिला चिकित्सालय में पोस्टमार्टम होता है। जिला चिकित्सालय में शहर और ग्रामीण इलाकों के कुल 15 थाने आते हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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