अभिशप्त जिंदगी से मुक्त महिलाओं के आत्मविश्वास ने किया चकित

अग्रणी गैर सरकारी संगठन सुलभ इंटरनेशनल द्वारा पुनर्वासित इन महिलाओं की जिंदगी की सच्ची कहानी पर अंग्रेजी में लिखित पुस्तक 'न्यू प्रिसेंस ऑफ अलवर' और हिंदी में लिखित पुस्तक 'अलवर की राजकुमारियां' का लोकार्पण करने के बाद मीरा कुमार ने कहा कि नौजवानों और बुद्धिजीवियों को इस कुप्रथा से देश को निजात दिलाने के लिए आगे आना होगा, तभी महात्मा गांधी और अंबेडकर का सपना पूरा होगा। पुस्तक का विमोचन संसद भवन परिसर के बालयोगी सभागार में किया गया। समारोह की अध्यक्षता पूर्व राज्यपाल और पूर्व केंद्रीय मंत्री भीष्म नारायण सिंह ने की।

मीरा कुमार ने कहा कि सुलभ ने इन महिलाओं को नारकीय जिंदगी से निजात दिलाकर सामाजिक बदलाव का अनूठा उदाहरण पेश किया है। उन्होंने कहा कि इन पुनर्वासित महिलाओं का आत्मविश्वास देखकर समाज में बदलाव की उम्मीद बढ़ी है। इस मौके पर भीष्म नारायण सिंह ने कहा कि जिस संवेदना और रचनात्मक ईमानदारी के साथ पुस्तकों में इन महिलाओं की कहानी पेश की गई है, वह प्रशंसनीय है। इस मौके पर कई महिलाओं ने आपबीती सुनाई। सुलभ के संस्थापक विदेश्वर पाठक ने सुलभ की संस्था 'नई दिशा' द्वारा इन महिलाओं के पुनर्वास की कहानी पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जब तक समाज में ऐसी कुप्रथा है, हमें चैन से नहीं बैठना चाहिए।

पुस्तकों में इन महिलाओं की आपबीती और दर्द भरी कहानियां हैं, जिन्हें दिल्ली के 110 पत्रकारों ने शब्दों में पिरोया है। इन सच्ची कहानियों की पात्र आज समाज में सम्मानित जिंदगी जी रही हैं और इसका श्रेय सुलभ को जाता है जिसने इन्हें सिलाई, कढ़ाई, आदि का हुनर सिखा कर सिर ऊंचा कर चलने के काबिल बनाया।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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