माता-पिता रोक सकते हैं बच्चों का मोटापा
अध्ययन में कहा गया है कि माता-पिता अगर बच्चों के खान-पान और व्यायाम पर ध्यान दें तो इस बीमारी से निजात पाया जा सकता है।
अमेरिकी साइकोलॉजिकल एसोसिएशन के 117वीं वर्षगांठ के अवसर पर कैलीफोर्निया स्टेट यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर इडवर्ड अब्राम्सन ने कहा, "बच्चों का मोटापा बहुत हद तक मनोवैज्ञानिक और सामाजिक स्थितियों जैसे पूर्वाग्रह, अपमान और हीन भावना पर निर्भर करता है। ये स्थितियां मोटापा के लिए जिम्मेदार हैं। टाइप-2 ं मोटापे में 10 गुना तेजी देखी गई है।"
'बॉडी इंटेलिजेंस' और 'इमोशनल इटिंग' के लेखक प्रोफेसर अब्राम्सन ने कहा, "भावनात्मक मजबूरी में भोजन या भूख के बगैर भोजना या फिर किसी कठोर डाइट का पालन करने की वजह से ही खाने की बुरी आदतों की शुरुआत होती है।"
प्रोफेसर अब्राम्सन ने कहा, "भावनात्मक रूप से खाना खाने की वजह से वजन बढ़ने की समस्या की शुरुआत होती है। माता-पिता का बच्चों के प्रति व्यवहार और नजरिया भी बच्चों को खाने के लिए प्रेरित करता है। पिता की अपेक्षा माता का व्यवहार बच्चों की खाने की आदत के लिए काफी हद तक मायने रखता है।"
अब्राम्सन ने कहा, "जो मां खुद मोटापा से जूझती हैं वही मां अपनी बेटियों का मोटापा बढ़ाने में मदद भी करती हैं।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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