'भारत को 20-30 टुकड़ों में तोड़ देना चाहिए'
इस लेख का प्रकाशन भारत-चीन सीमा विवाद पर दोनों देशों के बीच 13वें दौर की वार्ता की समाप्ति के समय हुआ है। शनिवार को समाप्त हुई वार्ता में चीन ने आपसी रणनीतिक विश्वास और साझेदारी को नए स्तर तक बढ़ाने पर जोर दिया है।
चीनी इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्ट्रेटेजिक स्टडीज (सीआईआईएसएस) की वेबसाइट पर प्रकाशित लेख में कहा गया है कि यदि चीन थोड़े से कदम उठाए तो तथाकथित महान भारतीय संघ बिखर सकता है।
चेन्नई स्थित सेंटर फॉर चाइना स्टडीज के निदेशक डी.एस.राजन के अनुसार लेख के लेखक झान लुई का तर्क है कि तथाकथित भारत राष्ट्र इतिहास में था, इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता क्योंकि यह एकता केवल हिंदू धर्म पर निर्भर है।
लेख में कहा गया है कि भारत को केवल "हिंदू धार्मिक राष्ट्र" की संज्ञा दी जा सकती है। यह जाति आधारित शोषण पर आधारित है और आधुनिकीकरण की राह में बाधा है।
लेखक के अनुसार भारत के जातीय विभाजन को ध्यान में रखकर चीन को स्वयं के हित में और पूरे एशिया की प्रगति के लिए असमी, तमिल और कश्मीरी जैसी विभिन्न राष्ट्रीयताओं के साथ एकजुट होना चाहिए और उनके स्वतंत्र राष्ट्र की स्थापना में सहयोग देना चाहिए।
लेख में विशेष रूप से भारत से असम की स्वतंत्रता हासिल करने के लिए चीन को यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम (उल्फा) का सहयोग करने को कहा गया है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


Click it and Unblock the Notifications