स्वाइन फ्लू से मृतकों की संख्या 4 हुई, प्रधानमंत्री ने की आजाद से बात (राउंडअप)
महाराष्ट्र और गुजरात प्रशासन को हाई अलर्ट कर दिया गया है। चार लोगों की मौत इन्हीं दोनों राज्यों में हुई है। देश में स्वाइन फ्लू के कुल मरीजों की संख्या 800 के करीब पहुंच गई है।
इंफ्लूएंजा ए (एच1एन1) वायरस के ताजा शिकार हुए संजय कोकरे एक गांव के स्कूल में शिक्षक थे। पुणे के सूसान अस्पताल में शनिवार की देर रात उनकी मौत हो गई।
गुजरात में एक अनिवासी भारतीय (एनआरआई) प्रवीण पटेल की अहमदाबाद में सिविल अस्पताल में रविवार सुबह मौत हो गई। वह अमेरिका के अटलांटा से एक सप्ताह पहले अहमदाबाद आए थे। उनकी पत्नी की हालत गंभीर बनी हुई है।
महाराष्ट्र परिवार कल्याण विभाग के अतिरिक्त निदेशक अशोक लाड्डा ने कहा कि कोकरे को सबसे पहले 31 जुलाई को तबीयत खराब होने पर पुणे के समीप स्थित खेड़ेगांव के एक अस्पताल में भर्ती करवाया गया था। बाद में स्थिति खराब होने पर उन्हें पुणे के अस्पताल में दाखिल करवाया गया था, जहां शनिवार देर रात उनकी मौत हो गई।
गुजरात के स्वास्थ्य मंत्री जयनारायण व्यास ने एनआरआई की मौत पर आईएएनएस से कहा, "यह दुखद है। अहमदाबाद में स्वाइन फ्लू से यह पहली मौत है।" पटेल और उनकी पत्नी की जांच शनिवार को सकारात्मक रही थी। यहां स्वाइन फ्लू के 13 मामले सामने आ चुके हैं और 53 अन्य मरीजों की जांच की जा रही है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने रविवार को स्वास्थ्य मंत्री गुलाम नबी आजाद को चिकित्सकों का एक दल गठित करने को कहा है जिससे लोगों में जागरूकता के लिए उचित जानकारी मुहैया कराई जा सके।
प्रधानमंत्री कार्यालय के एक अधिकारी ने आईएएनएस को बताया, "प्रधानमंत्री ने स्वास्थ्य मंत्री से चिकित्सकों के एक पैनल का गठन करने को कहा है, जो स्वाइन फ्लू के बारे में लोगों को सही जानकारी उपलब्ध कराएगा।"
मनमोहन सिंह ने कहा कि पैनल को मीडिया को भी उपयुक्त जानकारी देनी चाहिए जिससे कोई गलतफहमी पैदा न हो।
अधिकारी ने कहा कि रविवार सुबह प्रधानमंत्री को स्वाइन फ्लू से निपटने के लिए उठाए गए विभिन्न कदमों की जानकारी देने के लिए आजाद ने प्रधानमंत्री को फोन किया।
अधिकारी के अनुसार स्वास्थ्य मंत्री ने प्रधानमंत्री को आश्वस्त किया कि टैमीफ्लू का पर्याप्त भंडार है और जिन लोगों को वायरस से संक्रमित पाया जा रहा है उन्हें अलग रखा जा रहा है।
अधिकारी के अनुसार आजाद ने आश्वासन दिया कि केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राज्यों के स्वास्थ्य सचिवों से मिलेंगे और कैबिनेट सचिव को पूरी जानकारी से अवगत कराते रहेंगे।
एक तरफ प्रशासन इस घातक बीमारी का मुकाबला करने में जुटे हैं वहीं केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री गुलाम नबी आजाद के उस बयान से विवाद उत्पन्न हो गया है जिसमें उन्होंने कहा था कि स्वाइन फ्लू संक्रामक है और इस रोग से पीड़ित लोगों के जरिये इसका वायरस दूसरों को स्थानांतरित हो सकता है।
आजाद ने संवाददाताओं को बताया कि तीन अगस्त को फ्लू के कारण मौत की पहली शिकार बनी पुणे की स्कूली छात्रा रिदा शेख इलाज के लिए एक से अधिक अस्पताल में गई थी और इस कारण संभावना है कि 80 अन्य लोग फ्लू के वायरस से संक्रमित हो गए।
आजाद ने कहा, "एक छोटी बच्ची एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल गई, फिर तीसरे अस्पताल में उसका इलाज किया गया और उसके बाद चौथे अस्पताल में, वह भी बगैर जागरूकता के। इस पूरी प्रक्रिया में कोई 80 लोग संक्रमित हो गए। इलाज की प्रक्रिया में बच्ची से वायरस संक्रमित होते गए।"
आजाद के इस बयान के बाद पुणे में रिदा शेख के परिजनों ने मांग की है कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री गुलाम नबी आजाद या तो मांफी मांगें या पद से इस्तीफा दें।
रिदा की भावुक मां ने संवाददाताओं से यहां रविवार को कहा, "हम चाहते हैं कि सरकार इसके लिए माफी मांगे। आजाद ने एक मां के दिल को ठेस पहुंचाया है। उन्होंने मेरी बच्ची पर आरोप लगाया है कि उसने चार अस्पतालों का चक्कर लगाने के दौरान 80 लोगों को संक्रमित कर दिया। उन्हें अपने तथ्यों की सच्चाई जानने की जरूरत है।"
आजाद के बयान से क्रोधित रिदा की चाची आयशा शेख ने कहा, "हमारी बच्ची ने देश के लिए अपनी जान कुर्बान की है। उसकी मौत के कारण तमाम लोग स्वाइन फ्लू की जांच के लिए आगे आए हैं और उनमें फ्लू के वायरस की पुष्टि हुई है। कोई भी व्यक्ति नहीं चाहता कि उसके परिवार में रिदा जैसी कोई घटना हो।"
शेख ने कहा, "हम चाहते हैं कि या तो आजाद माफी मांगे या इस्तीफा दें अन्यथा हम प्रधानमंत्री के पास जाएंगे और उनके इस्तीफे की मांग करेंगे।"
देश में अब तक स्वाइन फ्लू के 783 मामले सामने आ चुके हैं और चार लोगों की मौत हो चुकी है। उपचार के बाद करीब 500 लोगों को अस्पताल से छुट्टी दी जा चुकी है। इस घातक बीमारी का सबसे अधिक असर दिल्ली और महाराष्ट्र में देखा जा रहा है।
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण ने रविवार तड़के राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र के उच्च स्तरीय अधिकारियों के साथ बैठक की। वहीं दिल्ली में मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने एक आपात बैठक बुलाई है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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