'बुंदेलखंड विकास प्राधिकरण से होगा क्षेत्र का विकास'
लखनऊ, 9 अगस्त(आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में फैले बुंदेलखंड क्षेत्र के लिए अलग विकास प्राधिकरण स्थापित करने का भले ही दोनों राज्यों की सरकारें विरोध कर रही हों, लेकिन बुंदेलखंड के निवासियों का मानना है कि इस प्राधिकरण के गठन से ही बुंदेलखंड क्षेत्र का विकास होगा और यह प्राधिकरण बुंदेलखंड राज्य निर्माण के लिए मील का पत्थर साबित होगा।
बुंदेलखंड के लोगों का मानना है कि यहां की गरीबी और पिछड़ापन तभी दूर हो सकता है जब यहां के विकास कार्य केंद्र सरकार की निगरानी में हों। क्योंकि दोनों राज्य सरकारें बुंदेलखंड के समुचित विकास के लिए मिलने वाले धन का दुरुपयोग करती हैं।
बुंदेलखंड डिग्री कॉलेज के प्रोफेसर बाबूलाल तिवारी ने आईएएनएस से कहा कि बुंदेलखंड में दशकों से कोई विकास कार्य नहीं हुआ। पिछड़ापन साल दर साल बुंदेलखंड को गरीबी की तरफ धकेलता गया। बीच में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा यहां के विकास के लिए बुंदेलखंड विकास निगम और मध्य प्रदेश सरकार की ओर से बुंदेलखंड विकास परिषद के गठन की दिखावटी औपचारिकताएं निभाई गईं।
तिवारी के मुताबिक बुंदेलखंड विकास प्राधिकरण के गठन का प्रस्ताव एक स्वागत योग्य कदम है। इस पर राजनीति नहीं की जानी चाहिए। इससे यहां विकास की शुरुआत होगी और प्राधिकरण का गठन राज्य निर्माण की आधारशिला होगी।
तिवारी कहते हैं कि एक समान संस्कृति वाला बुंदेलखंड प्रांत बनाया जाना चाहिए, तभी यह पिछड़ा अंचल विकास के पथ पर आगे बढ़ सकेगा और अपना खोया हुआ गौरव पा सकेगा।
बुंदेलखंड पृथक राज्य के लिए संघर्ष कर रही बुंदेली सेना के प्रमुख भानु सहाय कहते हैं कि हर हाल में प्राधिकरण का गठन होना चाहिए। इसके बन जाने के बाद राज्य सरकारें पैसे की बंदरबांट नहीं पर पाएंगी।
उन्होंने कहा कि प्राधिकरण से इस क्षेत्र तात्कालिक लाभ तो होगा, मगर बुंदेलखंड का पूर्ण विकास इसके अलग प्रांत बनने के बाद ही होगा।
सहाय कहते हैं कि बुंदेलखंड में केन, बेतवा, टोंस जैसी 10 नदियां हैं फिर भी बुंदेलखंड प्यासा है। पूरा क्षेत्र खनिज सम्पन्न है, लेकिन उसका फायदा बुंदेलखंडवासियों को नहीं मिल पाता। इस क्षेत्र की परीछा और माता टीला विद्युत परियोजनाओं की बिजली यहां के लोगों को मिलने के बजाय लखनऊ चली जाती है।
बुंदेलखंड एकीकरण समिति के अध्यक्ष विश्वनाथ शर्मा कहते हैं कि सरकारी अध्ययन के मुताबिक बुंदेलखंड में पानी, बिजली और सड़क जैसी मूलभूत सुविधाओं के अभाव में यहां से 40 फीसदी लोगों का पलायन हो चुका है। ऐसे में अगर प्राधिकरण का गठन हुआ तो सड़कें बनेंगी, बांध बनेंगे, बिजली का उत्पादन होगा, स्कूल कॉलेज खुलेंगे और लोगों को रोजगार मिलेगा। बुंदेलखंड से पलायन रुकेगा।
बुंदेलखंड के विकास के लिए पृथक विकास प्राधिकरण के केंद्र के प्रस्ताव का भारतीय जनता पार्टी(भाजपा) और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने विरोध किया है।
भाजपा प्रवक्ता एच.एन. दीक्षित का मत है कि बुंदेलखंड विकास प्राधिकरण का प्रस्ताव न केवल एकतरफा है, बल्कि संविधान विरोधी भी है। कांग्रेस ने राहुल गांधी को स्थापित करने के लिए यह कदम उठाया है। वहीं उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती का कहना है कि बुंदेलखंड के विकास के लिए किसी नए प्रशासिनक ढांचे की आवश्यकता नहीं, बल्कि अधिक आर्थिक सहायता की आवश्यकता है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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