सांस्कृतिक कूटनीति ने छोटी की राजनीतिक लकीरें
बेंगलुरू, 9 अगस्त (आईएएनएस)। दक्षिण भारत के दो राज्य कर्नाटक और तमिलनाडु ने सांस्कृतिक कूटनीति का रास्ता अख्तियार करते हुए अपने बीच विवादित मुद्दों को सुलझाने का एक अभिनव प्रयास आरंभ किया है। इस प्रयास ने राजनीतिक लकीरें भी छोटी कर दी हैं।
सांस्कृतिक कूटनीति का यह नमूना रविवार को उस वक्त देखने को मिला जब तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम. करुणानिधि ने कर्नाटक के मुख्यमंत्री वी.एस. येदियुरप्पा की उपस्थिति में तमिल संत व महान कवि तिरुवल्लुवर की प्रतिमा का अनावरण किया। इस प्रतिमा के अनावरण को लेकर पिछले 18 वर्षो से विवाद चल रहा था।
इस प्रयास की अगली कड़ी के तहत 13 अगस्त को तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई में कन्नड़ संत व कवि सर्वज्ञ की प्रतिमा का अनावरण किया जाना है। इस कार्यक्रम में येदियुरप्पा सर्वज्ञ की प्रतिमा का अनावरण करेंगे। दोनों मुख्यमंत्रियों के इस प्रयास ने जहां तमिलों व कन्नड़ों के बीच की खाई को पाटने का प्रयास किया है वहीं राजनीतिक लकीरों को भी छोटा करने की कोशिश की है।
द्रविण मुनेत्र कड़गम (डीएमके) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) किसी समय दोस्त थे लेकिन मौजूदा राजनीति में दोनों दो ध्रुव हैं। डीएमके केंद्र में संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार की प्रमुख सहयोगी है और भाजपा प्रमुख विपक्षी दल। इन राजनीतिक विरोधाभाषों को पीछे छोड़ते हुए दोनों मुख्यमंत्रियों ने अपने राज्यों के बीच लंबे समय से लंबित पड़ी जनहित की योजनाओं को क्रियान्वित करने की पहल आरंभ कर दी है। ज्ञात हो कि दोनों राज्यों के बीच कावेरी जल बंटवारे और नक्कन परियोजना को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है।
बहरहाल, इन प्रयासों में राजनीति भी अछूती नहीं है। भाजपा की कोशिश है कि राज्य के तमिल वोट बैंक को अपने पक्ष में किया जाए। अगले महीने स्थानीय निकाय के चुनाव में यह स्पष्ट हो जाएगा कि उसे इस खेल का कितना राजनीतिक लाभ मिलता है।
इस बारे में एक भाजपा नेता ने कहा, "इससे निश्चित तौर पर पार्टी को लाभ मिलेगा। बेंगलुरू सहित राज्य के तमान बड़े शहरों में तमिल मतदाताओं की संख्या अच्छी खासी है।"
उधर, तमिलनाडु में अगले साल विधानसभा के चुनाव होने हैं। करुणानिधि इस खेल का कितना लाभ मिलता है, यह भी तब ही पता चलेगा।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


Click it and Unblock the Notifications