अभी नहीं हुई है रिलायंस इंडस्ट्रीज के दावों की जांच: लेखा परीक्षक
इससे पहले हाइड्रोकार्बन महानिदेशक वी.के.सिब्बल ने कहा था कि सीएजी कार्यालय ने इस मामले में जरूरी लेखा परीक्षण का कार्य निपटा लिया है।
आईएएनएस से बातचीत में नियंत्रक व महालेखा परीक्षक विनोद राय ने कहा, "हमें रिलायंस इंडस्ट्रीज की फाइलों का लेखा परीक्षण का काम पूरा करना अभी बाकी है। हमें किसी निजी कंपनी की फाइलों के परीक्षण का अधिकार नहीं है। इस कारण रिलायंस इंडस्ट्रीज की फाइलें हमारे पास उपलब्ध नहीं हो पाई हैं।"
राय ने आईएएनएस को बताया, "हम लेखा परीक्षण का काम जल्द से जल्द पूरा करने के लिए सरकार के संपर्क में हैं।" इसके साथ ही लेखा परीक्षक कार्यालय के अधिकारियों ने कहा है कि रिलायंस इंडस्ट्रीज से जरूरी दस्तावेजों और प्रतिक्रियाओं को हासिल करने के लिए पेट्रोलियम मंत्रालय को एक पत्र लिखा गया है।
लेखा परीक्षक की यह टिप्पणी ऐसे समय में और महत्व रखती है, जब अनिल अंबानी समूह की ओर से आरोप लगाया जा रहा है कि रिलायंस इंडस्ट्रीज ने कृष्णा-गोदावरी बेसिन से गैस उत्पादन के लिए पूंजीगत व्यय को बढ़ा-चढ़ा कर पेश किया है।
दूसरी ओर हाइड्रोकार्बन महानिदेशक ने कहा है कि चूंकि पूंजीगत व्यय को सरकारी लेखा परीक्षक ने विधिवत देख लिया है, लिहाजा यह मामला अब बोर्ड के पास है।
रिलायंस इंडस्ट्रीज को क्लीन चिट देते हुए एक बयान में सिब्बल ने कहा था, "सीएजी के दल ने लेखा परीक्षण का काम पूरा कर लिया है। सीएजी का एक लेखा परीक्षण हाल में संपन्न हुआ है।"
सिब्बल ने कहा था, "पूंजीगत व्यय को बढ़ाचढ़ा कर पेश करने का आरोप लगाना व्यावसायिक अर्थशास्त्र के बारे में अज्ञानता को प्रदर्शित करता है। व्यय बढ़ने से किसी को भी लाभ नहीं होने वाला है। न तो ठेकेदार को और न सरकार को ही।"
सिब्बल ने कहा है कि कोई भी कंपनी अपने खर्च को बढ़ाना नहीं चाहेगी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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