बढ़ती कीमतों के कारण दाल की खपत में आई भारी गिरावट
एसोसिएटेड चैंबर्स ऑफ कामर्स एंड इंडस्ट्री (एसोचैम) की रिपोर्ट के अनुसार यदि उपाय नहीं किए गए तो वर्ष के शेष हिस्से में दाल की खपत और गिरकर नौ किलोग्राम प्रति व्यक्ति के स्तर तक जा सकती है।
एसोचैम की रिपोर्ट के अनुसार 1960 के दशक में देश में प्रति व्यक्ति दाल की खपत 27 किलोग्राम थी। बढ़ती कीमतों के कारण यह गिरकर 11 किलोग्राम प्रति व्यक्ति हो गई है।
रिपोर्ट के अनुसार दाल की कमी का सबसे बड़ा कारण राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन (एनएफएसएम) कार्यक्रम के तहत दाल उत्पादन क्षेत्र में विस्तार की कोई गंभीर पहल नहीं करना है।
मिशन का प्राथमिक ध्यान आमतौर पर गेंहू,चावल,मक्का और बाजरा की पैदावार बढ़ाने पर होता है। इसके कारण दालों का उत्पादन गिरा है। इस समय दालों की कीमतें पिछले वर्ष की तुलना में दोगुनी हैं।
एसोचैम के महासचिव डी.एस.रावत ने कहा, "यह स्पष्ट है कि वर्ष 1967 में हरित क्रांति के बाद से मुख्य फसलों की उपज में सबसे कम 1.14 प्रतिशत वार्षिक की वृद्धि दालों में हुई है।"
दूसरी तरफ गेंहू, चावल, दलहन और मक्के के उत्पादन में क्रमश: 2.8 प्रतिशत, 2.23प्रतिशत, 1.88 प्रतिशत और 1.7 प्रतिशत वार्षिक की वृद्धि हुई है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


Click it and Unblock the Notifications