बिहार में मार्च तक 40 लाख महिलाओं को साक्षर बनाने का लक्ष्य
कार्यक्रम के पहले चरण में रविवार से शिक्षकों (अक्षर दूत) को प्रशिक्षित किया जाएगा। शिक्षक अपनी सुविधा के अनुसार महिलाओं को साक्षर बनाने के लिए समय निर्धारित करेंगे। पढ़ाने की जगह साक्षरता केन्द्र विद्यालय, पंचायत भवन या चौपाल भी हो सकता है।
मानव संसाधन विभाग के प्रधान सचिव अंजनी कुमार सिंह ने शनिवार को आईएएनएस को बताया कि राज्य में दो तिहाई महिलाएं निरक्षर हैं। महिलाओं को साक्षर बनाने के लिए इस योजना में 55 करोड़ रुपए की राशि आवंटित की गई है। उन्होंने बताया कि सात सितंबर तक अक्षर दूतों को प्रशिक्षण दिया जाएगा और आठ सितंबर से निरक्षर महिलाओं को पढ़ाने का कार्यक्रम शुरू होगा जो आठ मार्च तक चलेगा। इस दौरान 40 लाख महिलाओं को साक्षर बनाने का लक्ष्य रखा गया है।
साक्षरता अभियान की सफलता के लिए जिला, प्रखंड तथा पंचायत स्तर पर समितियां बनाई गई हैं। सिंह के मुताबिक प्रत्येक केन्द्र को एक ट्रांजिस्टर दिया जाएगा और टेलीविजन व रेडियो कार्यक्रम भी तैयार किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि प्रत्येक जिले में 50 लोगों को मुख्य प्रशिक्षक का प्रशिक्षण दिया गया है। ये सभी अपने जिले में अक्षर दूतों को प्रशिक्षित करेंगें। महिलाओं को साक्षर बनाने के अभियान में नौवीं और दसवीं की छात्राओं का भी सहयोग लिया जाएगा।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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