राष्ट्रपति करेंगी सशस्त्र बलों के अधिकरण का उद्घाटन
इस अधिकरण का गठन संसद के अधिनियम- 2007 के तहत किया गया है। अधिकरण की मुख्य खंडपीठ दिल्ली में होगी तथा पूरे देश में इसकी आठ शाखाएं तथा 15 अदालतें होंगी। नई दिल्ली, चंडीगढ़ तथा लखनऊ में तीन-तीन अदालतें और जयपुर, मुंबई, कोलकाता, गुवाहाटी, चेन्नई और कोचि में एक-एक अदालतें होंगी।
इस अधिकरण के गठन से 13 लाख सशस्त्र बल कर्मियों तथा 12 लाख पूर्व सैन्य कर्मियों की शिकायतों को निपटाने में सहायता मिलेगी। फिलहाल देश की विभिन्न अदालतों में इस तरह के लगभग 9,000 मामले लंबित पड़े हैं, जिनमें से अधिकतर उच्च न्यायालयों में हैं। इस अधिकरण के फैसलों को केवल उच्चतम न्यायालय में ही चुनौती दी जा सकेगी।
इस अधिकरण में एक अध्यक्ष होगा जो उच्चतम या उच्च न्यायालय का पूर्व या वर्तमान न्यायाधीश होगा। उच्चतम न्यायालय के पूूर्व न्यायाधीश ए़ के. माथुर को इस अधिकरण का प्रथम अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। वह पहली सितंबर, 2009 को पदभार ग्रहण करेंगे।
इसके अलावा प्रत्येक अदालत में एक न्यायिक सदस्य और एक प्रशासनिक सदस्य होगा। अधिकरण की नौ शाखाओं की 15 अदालतों में कुल 30 सदस्य होंगे। इनमें अध्यक्ष सहित 15 न्यायिक सदस्य तथा इतने ही प्रशासनिक सदस्य होंगे। न्यायिक सदस्य के रूप में उच्च न्यायालय के वर्तमान न्यायाधीश या पूर्व न्यायाधीश की ही नियुक्ति की जाएगी।
प्रशासनिक सदस्य रूप में मेजर जनरल या तीनों सेनाओं में से किसी एक में समकक्ष पदधारी या ब्रिगेडियर रैंक के अधिकारी या उसके समकक्ष किसी अधिकारी को ही नियुक्त किया जाएगा। इन अधिकारियों को कम से कम एक साल तक थलसेना, नौसेना या वायुसेना में न्यायाधीश या महान्यायवादी के पद पर काम करने का अनुभव होना अनिवार्य है।
सरकार ने 15 प्रशासनिक सदस्यों की नियुक्ति कर दी है, जबकि बाकी सात के नामों को अभी मंजूरी दी जानी है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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