राष्ट्रपति ने सशस्त्र बल अधिकरण का उद्घाटन किया (लीड-1)
इस अधिकरण के गठन के लिए काफी दिनों से मांग की जा रही थी। यह अधिकरण देश की विभिन्न अदालतों में लंबित पड़े सेना से संबंधित लगभग 9,000 मामलों का निपटारा करेगी। इनमें से अधिकतर मामले उच्च न्यायालयों में हैं।
अधिकरण के उद्घाटन के अवसर पर राष्ट्रपति पाटिल ने कहा, "सेना, नौसेना और वायु सेना के सदस्यों के लिए स्थापित किया गया यह सशस्त्र बल अधिकरण उनके सेवा संबंधी मामलों में न्याय आपूर्ति प्रणाली पर उनके विश्वास और आत्मविश्वास के स्तर को बढ़ाएगा। इस तरह देश में सशस्त्र बलों के इतिहास में यह एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा।"
सरकार द्वारा अधिसूचना जारी हो जाने के बाद यह अधिकरण कार्य करना आरंभ कर देगा।
इस अधिकरण का गठन संसद के अधिनियम- 2007 के तहत किया गया है। अधिकरण की मुख्य खंडपीठ दिल्ली में होगी तथा पूरे देश में इसकी आठ शाखाएं तथा 15 अदालतें होंगी। नई दिल्ली, चंडीगढ़ तथा लखनऊ में तीन-तीन अदालतें और जयपुर, मुंबई, कोलकाता, गुवाहाटी, चेन्नई और कोच्चि में एक-एक अदालतें होंगी।
पाटिल ने कहा, "जब किसी खास मांग को पूरा करने के लिए किसी नए संस्थान की स्थापना की जाती है तो निश्चित रूप से उससे उम्मीदें काफी ऊंची होती हैं। लेकिन इस नई संस्था का लाभ यह है कि यह नियमों, कानूनों और कार्य पद्धतियों का निर्धारण करेगी और इस तरीके से यह अपने उद्देश्य को अति प्रभावी तरीके से हासिल करेगी।"
यह अधिकरण सशस्त्र बलों के जवानों के लिए कोर्ट मार्शल आदेश के खिलाफ एक अपीली अदालत के रूप में भी काम करेगा।
यह अधिकरण जब सेवा मामलों की सुनवाई करेगा तो एक नागरिक अदालत के रूप में काम करेगा और जब कोर्ट मार्शल के खिलाफ याचिकाओं की सुनवाई करेगा तो यह एक आपराधिक अदालत के रूप में काम करेगा।
इस अधिकरण के फैसलों को केवल सर्वोच्च न्यायालय में ही चुनौती दी जा सकेगी।
इस अधिकरण में एक अध्यक्ष होगा जो सर्वोच्च न्यायालय का वर्तमान या सेवानिवृत्त न्यायाधीश या किसी उच्च न्यायालय मुख्य न्यायाधीश होगा। उच्चतम न्यायालय के पूूर्व न्यायाधीश ए़ के. माथुर को इस अधिकरण का प्रथम अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। वह पहली सितंबर, 2009 को पदभार ग्रहण करेंगे।
इसके अलावा प्रत्येक अदालत में एक न्यायिक सदस्य और एक प्रशासनिक सदस्य होगा। अधिकरण की नौ शाखाओं की 15 अदालतों में कुल 30 सदस्य होंगे। इनमें अध्यक्ष सहित 15 न्यायिक सदस्य तथा इतने ही प्रशासनिक सदस्य होंगे। न्यायिक सदस्य के रूप में उच्च न्यायालय के वर्तमान न्यायाधीश या पूर्व न्यायाधीश की ही नियुक्ति की जाएगी।
प्रशासनिक सदस्य रूप में मेजर जनरल या तीनों सेनाओं में से किसी एक में समकक्ष पदधारी या ब्रिगेडियर रैंक के अधिकारी या उसके समकक्ष किसी अधिकारी को ही नियुक्त किया जाएगा। इन समकक्ष अधिकारियों को कम से कम एक साल तक थलसेना, नौसेना या वायुसेना में न्यायाधीश या महान्यायवादी के पद पर काम करने का अनुभव होना अनिवार्य है।
सरकार ने 15 प्रशासनिक सदस्यों की नियुक्ति कर दी है, जबकि बाकी सात के नामों को अभी मंजूरी दी जानी है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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