नेपाल में वार्ता विफल, शांति प्रक्रिया खतरे में
इस कदम से अगले वर्ष की गर्मियों में नए संविधान की घोषणा मुल्तवी हो सकती है।
ब्रिटेन के 10 दिवसीय दौरे पर रवाना होने से पहले पूर्व प्रधानमंत्री प्रचंड ने कहा, "यदि प्रधानमंत्री संसद में चर्चा का एक उपयुक्त वातावरण बनाने के लिए राजी हों तो हम अपना विरोध वापस ले सकते हैं।"
बहरहाल उन्होंने कहा कि यह संभव नहीं होगा।
सेनाध्यक्ष रुक्मांगद कटवाल से उलझने के कारण माओवादी पार्टी की आठ माह पुरानी सरकार गिर गई थी और तभी से वह संसद में इस मुद्दे पर चर्चा करानी चाहती है।
प्रचंड की सरकार के गिरने के बाद से ही माओवादियों ने संसद को ठप कर दिया था। प्रधानमंत्री के इस मुद्दे पर चर्चा के आश्वासन के बाद माओवादियों ने दो महीने बाद अपना विरोध वापस लिया।
शुक्रवार को माओवादियों ने कहा कि सरकार को दिया गया एक महीने का समय बिना किसी नतीजे के समाप्त हो गया और वे फिर से संसद में विरोध आरंभ करेंगे। उन्होंने सड़कों पर जन प्रदर्शन करने की भी घोषणा की है इससे प्रशासन के पंगु होने का खतरा है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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