प्रधानमंत्री ने कहा, सूखे से निपटने की आपात योजना बनाएं राज्य (लीड-1)
प्रधानमंत्री ने स्थिति से निपटने के लिए राज्यों को केंद्र सरकार से सभी प्रकार की सहायता देने का प्रस्ताव करते हुए कहा कि यदि आवश्यकता हो तो सरकार को "कड़े कदम उठाने और बाजार में हस्तक्षेप करने नहीं हिचकना चाहिए।"
राज्यों के मुख्य सचिवों की एक बैठक में मनमोहन सिंह ने कहा कि देश आज कठिन स्थिति से जूझ रहा है। मानसून में देरी हुई है और कई स्थानों पर अपर्याप्त वर्षा हुई है, यद्यपि देश के कुछ हिस्सों में सामान्य और अधिक वर्षा हुई है।
उन्होंने कहा कि देश के कई हिस्सों में खेती बुरी तरह प्रभावित हुई है और इसके कारण किसानों और उनके परिवारों के लिए संकट पैदा हुआ है।
उन्होंने कहा, "आवश्यकता पड़ने पर हमें कड़े कदम उठाने और बाजार में हस्तक्षेप करने से नहीं हिचकना चाहिए।"
मनमोहन सिंह ने कहा, "हम सभी को तत्काल, सामूहिक और प्रभावी रूप से काम करने की आवश्यकता है।"
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार राज्यों को आवश्यक सभी सहयोग उपलब्ध कराएगी और किसी भी स्थिति में नागरिकों को भूखा नहीं रहने देगी।
भारतीय मौसम विभाग के एक जून से पांच अगस्त के बीच मानसून की वर्षा में 25 प्रतिशत की कमी रहने के बयान के एक दिन बाद प्रधानमंत्री ने यह टिप्पणी की है। कम वर्षा का सबसे अधिक प्रभाव देश के प्रमुख खाद्यान्न उत्पादक राज्यों पंजाब और हरियाणा पर पड़ा है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि धान की फसल कम वर्षा से सबसे अधिक प्रभावित हुई है और फसल के क्षेत्रफल में 60 लाख हेक्टेयर की कमी दर्ज की गई है।
बहरहाल सिंह ने कहा कि सरकार सूखा प्रभावित क्षेत्रों में पर्याप्त खाद्यान्न की उपलब्धता सुनिश्चित करने में सक्षम है।
सिंह ने चेतावनी दी कि खरीफ की पैदावार में कमी से आने वाले महीनों में खाद्यान्नों की कीमतें बढ़ सकती हैं। उन्होंने राज्य सरकारों से केंद्र सरकार के साथ मिलकर काम करने और सार्वजनिक वितरण प्रणाली को सक्रिय करने का आग्रह किया।
उन्होंने राज्य सरकारों से भंडारण सीमा का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चत कराने और कालाबाजारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने को कहा।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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