'फोर्ब्स' ने किया हरदा की मंडी का गुणगान
हरदा कृषि उपज मंडी की पहचान गेहूं उत्पादन को लेकर है। यहां किसानों के साथ व्यापारियों की जरूरत को ध्यान में रखकर तमाम सुविधाएं मौजूद हैं।
यद्यपि, उपज खरीदने के लिए क्षेत्र में आई निजी कंपनियों ने मंडियों के सामने चुनौतियां पैदा कर दी हैं। बाजार बदल रहा है। वायदा बाजार ने व्यापार का तौर-तरीका बदल दिया है। इसके बावजूद हरदा की मंडी किसानों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। सरकारी क्षेत्र की यह मंडी निजी कंपनियों का पूरी ताकत से मुकाबला कर रही है।
फोर्ब्स (भारत संस्करण -जून, 2009) के मुताबिक यहां किसानों की फसल की तौल से लेकर भुगतान तक सारा काम व्यवस्थित और पूरी पारदर्शिता के साथ होता है। यही वजह है कि किसानों का मंडी के प्रति भरोसा बढ़ा है। 60 एकड़ में फैली इस मंडी में अधोसंरचना पर विशेष ध्यान दिया गया है। यहां सारी सुविधाएं मसलन आधुनिक तौल कांटा, फसल के लिए शेड वाहन खड़े करने का स्थान और पानी का विशेष इंतजाम है।
मंडी के सचिव संजीव श्रीवास्तव ने आईएएनएस से चर्चा में कहा कि मंडी में नाबार्ड के सहयोग से विकास कार्य कराए गए है। यह मंडी किसानों में वह भरोसा पैदा करने में सफल रही है जिसकी उन्हें दरकार थी। निजी कंपनियों की बढ़ती दखल के बीच यह मंडी सरकारी योजनाओं और परंपरा के मुताबिक काम करने में सफल रही है और किसानों को अपनी ओर खींचने में सफल रही है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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