'निजी स्कूलों को फीस बढ़ाने का हक नहीं'

गैरसहायता प्राप्त निजी स्कूलों की एक समिति द्वारा दी गई याचिका को खारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सिर्फ सरकार ही निजी स्कूलों की फिस को नियंत्रित कर सकती है। लिहाजा प्राइवेट स्कूल मनमाने ढंग से फीस नहीं बढ़ा सकते हैं। कोर्ट ने कहा कि फीस बढ़ाने पर सरकार दखल दे सकती है। कोर्ट ने कहा कि फीस बढ़ाने से पहले प्राइवेट स्कूलों को राज्य के शिक्षा निदेशक से अनुमति लेनी होगी।
निजी स्कूलों का तर्क
वहीं याचिका दायर करने वाले पक्ष की दलील थी कि छठा वेतन आयोग लागू होने के बाद से टीचरों को अधिक वेतन देना पड़ रहा है, जिसकी वजह से फीस बढ़ाना मजबूरी हो गया है। इस पर भी सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षा निदेशक की मंजूरी लेने को कहा।
गौरतलब है कि देश भर में चल रहे निजी स्कूल हर साल मनमाने ढंग से फीस बढ़ा देते हैं, जिस कारण अभिभावकों पर बहुत अधिक आर्थिक दबाव पड़ता है। हालांकि कुछ राज्य सरकारों ने स्कूलों की फीस को लेकर निमावली भी बनायी है। सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद सरकार को निजी स्कूलों पर लगाम कसना आसान हो जाएगा।


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