शाही हत्याकांड का साजिशकर्ता गिरफ्तार

शेरचन ने गुरुवार को राजधानी काठमांडू के मीडिया क्लब में दावा किया था कि जून 2001 में हुए शाही खानदान हत्याकांड की साजिश उसी ने रची थी। परंपरागत नेपाली पोशाक और नेपाली टोपी पहने शेरचन ने यह घोषणा कर सबको चौंका दिया कि वह नरेश बीरेंद्र के कार्यकाल के दौरान गुप्तचर ब्यूरो का प्रमुख था।
शेरचन ने बताया कि उसने यह साजिश 1975 में लंदन में रची थी और उसके पास अपना दावा सिद्ध करने के लिए टेप्स हैं। यह पूछने पर कि उन्होंने ऐसा क्यों किया, शेरचन ने दावा किया कि उसे जानकारी मिली थी कि शाही खानदान के सदस्यों ने विदेशों से मिली सहायता राशि निकाल ली है। यदि वह धन नेपाल में लगाया जाता तो देश की अर्थव्यवस्था का स्वरूप बदल गया होता।
शेरचन ने यह भी दावा किया कि उन्होंने बार-बार शाही परिवार से कुछ दौलत नेपाल में निवेश करने को कहा था लेकिन उन्होंने इससे इंकार कर दिया और 38 महीनों के लिए जेल में डाल दिया।
शाही खानदान की प्रतिक्रिया नहीं
नेपाल के प्रमुख मीडिया ने जहां इस दावे को नजरंदाज किया है वहीं कुछ लोगों ने इस मजाक करार दिया है। शाही खानदान ने भी इस बारे में कोई प्रतिक्रिया नहीं दी हैं। उनका कहना है कि वे किसी तुल प्रसाद शेरचन को नहीं जानते। केवल माओवादियों ने इस पर प्रतिक्रिया दी है और इसे दिसंबर में होने वाली पूर्व नरेश ज्ञानेंद्र की संभावित भारत यात्रा से जोड़कर देखा है। पुलिस ने तुल प्रसाद शेरचन को गिरफ्तार कर हुनमानढोका पुलिस थाने में रखा है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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