महंगाई से हुई आम आदमी की नींद हराम : शरद पवार

आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि के मुद्दे पर लोकसभा में दो दिनों तक चली बहस का जवाब देते हुए पवार ने कहा, "सूखा, बाढ़ और महंगाई पहले भी हमने देखी है लेकिन इस बार तो आम आदमी की नींद खराब होने की स्थिति पैदा हो गई है।" हालांकि उन्होंने इस बात से इंकार किया कि कुछ देशों से निर्यात की गई दालें बंदरगाहों पर सड़ रही हैं।

उन्होंने कहा कि दाल और चीनी की बढ़ी कीमतों से आम आदमी के लिए दाल-रोटी भी जुटा पाना मुश्किल हो गया है। उन्होंने कहा, "दालों में अरहर, उड़द और मूंग की दालों का इस बार उप्तादन घटने से ऐसा हुआ। कम उत्पादन के चलते सरकार ने चार एजेंसियों को दाल का निर्यात करने का जिम्मा दिया। पूरी दुनिया में दाल का जो देश अत्यधिक उत्पादन करते हैं हमने उनसे भी दाल खरीदा लेकिन इसके बावजूद मांग और आपूर्ति के बीच के अंदर को पाटा नहीं जा सका। नतीजतन दाल की कीमतें आसमान छू रही हैं।"

चीनी की बढ़ी कीमतों पर सफाई देते हुए उन्होंने कहा, "चीनी का उत्पादन घटने और बढ़ने का एक चक्र होता है। तीन साल यदि चीनी का उत्पादन अधिक होता है तो अगले दो साल इसके उत्पादन में कमी आती है। इसकी वजह है कि अधिक उत्पादन के चलते मांग घट जाती है और किसान चीनी की जगह गेहूं का उत्पादन करने लगते हैं। इसके चलते उत्पादन पर असर होता है।"

उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र चीनी का सर्वाधिक उत्पादन करते हैं लेकिन इस वर्ष दोनों ही राज्यों में इसका उत्पादन घटा जिसके चलते इसकी उपलब्धता कम हुई और मांग और आपूर्ति के बीच की खाई बढ़ गई। इस खाई को पाटने के लिए हमने चीनी का आयात किया।

पवार ने कहा, "हम ऐसी चीनी का आयात नहीं करते हैं जो सीधे ग्राहकों तक पहुंचे। बल्कि कच्चे तौर पर तैयार चीनी का आयात करते हैं उसे अपने देश के मिलों में प्रसंस्करण करने के बाद ग्राहकों को बेचते हैं। इससे देश के श्रमिकों को भी रोजगार मिलता रहता है और यह चीनी सस्ती भी होती है।"

उन्होंने कहा कि अब तक 29 लाख टन कच्चे तौर पर तैयार चीनी का आयात किया जा चुका है। अगले महीने इसके प्रसंस्करण का काम शुरू हो जाएगा। इसके बाजार में आते ही चीनी की कीमतें कम होने की हमें उम्मीद है।

पवार ने कहा कि देश की खाद्य सुरक्षा को लेकर चिंतित होने की कोई आवश्यकता नहीं है क्योंकि सरकार के पास अनाजों का पर्याप्त भंडार है। उन्होंने कहा, "हमारे पास 252 लाख टन गेहूं और 356 लाख टन चावल का भंडार है। अगले 13 महीनों के लिए पर्याप्त मात्रा में गेहूं और चावल का बफर स्टॉक हमारे पास है जो पहले कभी नहीं रहा।"

जमाखोरी और कालाबाजारी पर उन्होंने कहा कि इसे लेकर सरकार बेहद गंभीर है और ऐसा करने वाले लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

महंगाई पर सरकार के बयान से असंतुष्ट राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के घटक दलों और वामपंथी दलों ने सदन से बहिर्गमन किया।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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