भाजपा की चुनावी हार का गम हुआ कम!

नई दिल्ली, 7 अगस्त (आईएएनएस)। कहावत है 'दिल बहलाने को गालिब ख्याल अच्छा है।' भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर यह कहावत पूरी तरह चरितार्थ होती है। पार्टी नेता इस बात से गदगद हैं कि संसद सत्र में सरकार को बैकफुट पर धकेलने में मिली उसकी सफलता ने लोकसभा चुनाव में मिली असफलता के गम को कम कर दिया है।

संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार के दूसरे कार्यकाल का बजट सत्र शुक्रवार को समाप्त हो गया। इस सत्र में निश्चित तौर पर सरकार बैकफुट पर रही। भारत और पाकिस्तान के बीच जारी हुए संयुक्त वक्तव्य और महंगाई के मुद्दे पर जहां विपक्ष उसे चौतरफा घेरने में सफल रहा वहीं उसने अपनी गलतियों के कारण दो विधेयकों को वापस लौटाकर अपनी किरकिरी भी कराई।

भाजपा गदगद है कि उसने संप्रग सरकार को उसके 'हनीमून पीरियड' में ही न सिर्फ चौतरफा घेरा बल्कि उसे पूरी तरह बैकफुट पर धकेल दिया। लोकसभा में भाजपा की उपनेता सुषमा स्वराज कहती हैं, "इस सत्र में हम अपने प्रदर्शन से न सिर्फ खुश हैं बल्कि संसद सत्र में मिली सफलता ने लोकसभा चुनाव में मिले हार के गम को भी कम कर दिया है।"

उन्होंने कहा, "पिछली लोकसभा में बेशक हमारे सदस्यों की संख्या अधिक थी और इस बार उससे भी कम हुई है। लेकिन इसके बावजूद हम प्रभावी विपक्ष की भूमिका निभाने में सफल रहे हैं। पिछली लोकसभा के मुकाबले सदस्यों की संख्या कम होने से हमारे मनोबल पर कोई असर नहीं पड़ा है। सदस्यों में खासा उत्साह रहा इस सत्र के दौरान।"

सुषमा ने कहा, "लोकसभा चुनाव में मिली असफलता से सदस्यों में निराशा जरूर थी और हमें लगता भी था कि इसका असर संसद में दिखेगा। लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। बल्कि हमने और आक्रामक तरीके से सरकार को घेरा। उसे इस कदर बैकफुट पर धकेला कि उसे दो विधेयकों को सदन में पेश करने से पहले ही वापस लेना पड़ा।"

संसद सत्र में अपने प्रदर्शन से पार्टी इतनी गदगद है कि उसने लोकसभा चुनाव में हुई पराजय के लिए बुलाई गई चिंतन बैठक के मुख्य एजेंडे को ही बदल दिया। संसद में पार्टी के प्रदर्शन और नेताओं के उत्साह को देखते हुए पार्टी नेताओं को अब चिंतन बैठक में चुनावी हार की समीक्षा करना बेमानी लगने लगा है। तभी तो उसने इसी महीने शिमला में होने वाली चिंतन बैठक के मुख्य एजेंडे की जगह भविष्य की भाजपा को प्रमुखता दी है।

संवाददाताओं से मुखातिब पार्टी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी ने शुक्रवार को कहा, "बैठक में लोकसभा चुनाव में हुई हार के कारणों पर तो चर्चा होगी ही भविष्य में पार्टी की राह क्या होगी उस पर भी मंथन होगा।

एक सवाल के जवाब में आडवाणी ने कहा, "लोकसभा चुनाव में मिली हार से पार्टी नेताओं को हुई निराशा का दौर अब खत्म हो चुका है। अब कोई निराशा नहीं है। आगे का रास्ता हमें देखना है। आगे जो चुनाव हैं उस पर ध्यान दिया जाएगा।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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