गायत्री देवीः निधन के बाद संपत्ति विवाद

मंगलवार को रामबाग पैलेस से राजमाता के आवास लिली पूल को जाने वाले रास्ते पर एक दीवार खींच दी गई। रामबाग की तरफ खुलने वाली सड़क अब हमेशा के लिए बंद कर दी गई है। जब तक राजमाता जीवित थीं, उन्हें और उनके स्टाफ को रामबाग पैलेस जाने की इजाजत थी।
रामबाग पैलेस को सवाई मान सिंह के बेटे पृथ्वी सिंह और जय सिंह ताज होटल ग्रुप के साथ मिलकर एक फाइव स्टार होटल के रूप में चला रहे हैं। वे दोनों मान सिंह की दूसरी पत्नी किशोर कंवर की संतानें हैं। वहीं गायत्री देवी सवाई मान सिंह की तीसरी पत्नी थीं।
उधर रामबाग पैलेस और लिली पूल को अलग करने वाली फेंसिंग को हटा दिया गया। इससे यह स्पष्ट है कि हटाने वालों की मंशा यह है कि दोनों संपत्तियों के बीच कोई स्पष्ट विभाजन रेखा न दिखे। सूत्र बताते हैं कि दरअसल इन सब कार्रवाइयों के पीछे मुद्दा लिली पूल की तीन बीघा जमीन को कब्जे में करना है जो अब तक रामजाता का स्टाफ सब्जियां उगाने के लिए इस्तेमाल करता था।
गायत्री देवी के पोते देवराज सिंह, जो कि उनके स्वर्गीय बेटे जगत सिंह की संतान हैं और थाईलैंड में रहते हैं, दादी की मौत के बाद जयपुर में ही डेरा डाल रखा है। उन्होंने मीडिया से बातचीत में बताया कि वे फिलहाल कोई कानूनी कदम उठाने नहीं जा रहे हैं क्योंकि उन्हें अभी तक यह मालूम नहीं है कि दादी अपने पीछे क्या संपत्ति छोड़ गई हैं।
बहरहाल महल से छनकर आ रही खबरों के मुताबिक सारा मामला तभी स्पष्ट होगा जब गायत्री देवी की वसीयत को पढ़ा जाएगा। संभावना है कि तेरहवीं के बाद नौ अगस्त को वसीयत सार्वजनिक की जाएगी।
उधर रामबाग पैलेस का कहना है कि फेंसिंग को हटाना दरअसल एक नियमित प्रक्रिया का हिस्सा जो हर मानसून के बाद होता है। हालांकि इस पूरे मामले में चुप्पी बनाए रखने के बावजूद देवराज बहुत गौर से घटनाओं को समझ रहे हैं और शोक खत्म होने का इंतज़ार कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि यह कुछ कहने के लिए सही समय नहीं है। किसी भी तरह के विवाद से एक गलत संदेश जाएगा और यह परिवार की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाएगा। मगर महल के आसपास लग रहे कयासों से तो ऐसा ही लगता है कि महल भीतर ही भीतर दो हिस्सों में विभाजित हो चुका है।


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