अब 'चिकन टिक्का मसाला' का पेटेंट

लेबर पार्टी के पाकिस्तानी मूल के सांसद मोहम्मद सरवर ने ब्रिटेन की संसद के निचले सदन में यह प्रस्ताव पेश किया कि राष्ट्रीय व्यंजन के तौर चुने गए "चिकन टिक्का मसाला" की उत्पत्ति स्कॉटलैंड के शहर ग्लासगो में हुई है। स्कॉटलैंड के कई सांसदों ने सरवर के इस प्रस्ताव का समर्थन किया। सबने दावा किया कि "चिकन टिक्का मसाला" का जन्म 1970 में ग्लासगो में हुआ। इसी के मद्देनजर ब्रिटेन की संसद ने यूरोपीय यूनियन से कहा है कि वह इस व्यंजन के "प्रोटेक्टेड डेस्टीनेशन ऑफ ओरिजिन" के साथ ग्लासगो का नाम जोड़ दे।
चिकन टिक्का, मुगलई व्यंजन
इस बीच, ब्रिटेन के समाचार पत्रों ने खबर दी है कि दिल्ली के खानसामों और खाद्य विशेषज्ञों के बीच इस बात को लेकर खासा रोष है। अंतिम मुगल बादशाह बहादुर शाह जफर के खानसामा द्वारा स्थापित दिल्ली के करीम होटल के प्रमुख खानसामा जैमुद्दीन अहमद ने कहा कि "चिकन टिक्का मसाला" उनकी कई पीढ़ियों के हाथों से होता हुआ ब्रिटेन पहुंचा है।
उन्होंने कहा, "चिकन टिक्का मसाला हमारे पूर्वजों द्वारा इजाद किया गया मूल मुगलई व्यंजन है। हमारे वंशजों ने इसे बनाने की विधि विकसित की थी। वे मुगल दरबार में खानसामा थे। मुगलों को कई दिनों तक जंगलों में रहना पड़ता था लिहाजा उन्हें मसालों में भुने हुए मुर्गे बहुत रास आते थे।"
'ईटिंग आउट" नाम का एक खाद्य समूह चलाने वाले हिमांशु कुमार ने साफ शब्दों में कहा कि चिकन टिक्का मसाला का विदेशी व्यंजन के तौर पर पेटेंट किया जाना बेहद निराशाजनक बात है।
व्यंजन का पेटेंट गलत
उन्होंने कहा, "चिकन टिक्का मसाला नाम का पेटेंट करने का कोई सवाल ही पैदा नहीं होता। यह कई पीढ़ियों से भारत में तैयार होता रहा है। किसी व्यंजन के नाम का पेटेंट नहीं किया जा सकता। यह निर्थक बात है।"
दिल्ली के एक खाद्य विशेषज्ञ राहुल वर्मा इनसे अलग विचार रखते हैं। वह इसे मुगलई व्यंजन नहीं मानते। उनका मानना है कि उन्होंने चिकन टिक्का मसाला का स्वाद सबसे पहले 1971 में राजधानी दिल्ली के पंडारा रोड मार्केट में स्थित एक रेस्टोरेंट में लिया था।
वर्मा ने कहा, "जैसा कि नाम से विदित है, चिकन टिक्का मसाला की उत्पत्ति विभाजन से पहले पंजाब में हुई थी। यह 40-50 साल से अधिक पुराना नहीं है। शुरुआत में चिकन टिक्का मसालों और प्याज के बिना ही बनाया जाता था। यह अमीर लोगों को पसंद था। पुरानी दिल्ली में कभी भी लोगों ने चिकन पसंद नहीं किया। वहां के लोगों को रेड मीट (बकरे का मांस) पसंद था। "
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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