कश्मीर पर पाक के सामने झुकने की शुरुआत है संयुक्त वक्तव्य : आडवाणी
अपनी आत्मकथा 'माई कंट्री माई लाइफ' के उर्दू संस्करण 'मेरा वतन मेरी जिंदगी' के लोकार्पण के अवसर पर आडवाणी ने यह बात कही। उन्होंने कहा, "भारत-पाक संयुक्त वक्तव्य पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह तथ उनके सहयोगियों की ओर से किए गए खंडनों के बावजूद संदेह पैदा होता है कि यह संयुक्त वक्तव्य कश्मीर मसले पर विदेशी दबाव के आगे झुकने की संप्रग की शुरुआत है।"
उन्होंने कहा कि इस मसले पर राष्ट्र के समक्ष स्पष्टीकरण देने के मामले में भी प्रधानमंत्री ने थोड़ी भी ईमानदारी नहीं बरती। इस मसले पर प्रधानमंत्री ने संसद में जो सफाई दी उससे देश की जनता संतुष्ट नहीं है।
उन्होंने कहा, "सरकार को या तो यह स्वीकार करना चाहिए कि उसने यह संयुक्त वक्तव्य जारी कर भूल की है और वह इसे सुधारने का वादा करती है या फिर उसे स्पष्ट करना चाहिए कि पाकिस्तान के साथ रिश्ते सामान्य करने के पीछे उसकी मंशा क्या है।"
आडवाणी ने कहा, "सरकार दोनों में से कुछ नहीं कर रही है। जिसके परिणामस्वरूप लोगों को लगता है कि दाल में कुछ न कुछ काला जरूर है।"
सांस्कृतिक राष्ट्रवाद का अर्थ मुसलमान विरोधी होना नहीं :
आडवाणी ने कहा कि भाजपा की सांस्कृतिक राष्ट्रवाद को लेकर देश में कई तरह की भ्रांतियां है। यह न तो धार्मिक विचार है और न ही मुसलमान विरोधी है।
उन्होंने कहा, "देश की सांस्कृतिक भिन्नताएं और धार्मिक व अन्य विविधताएं ही एकरुपता में सांस्कृतिक राष्ट्रवाद है। यह मैंने किताबों में नहीं पढ़ी है बल्कि जिस वातावरण में मैं पला बढ़ा हूं उसमें मैंने महसूस किया है।"
उन्होंने कहा, "मैं मुसलमान देशभक्तों से अपील करता हूं कि वे सांस्कृतिक राष्ट्रवाद को सही परिप्रेक्ष्य में समझें।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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