मुंबई बम विस्फोटों में 3 को मौत की सजा (राउंडअप)
आतंकवाद निरोधक अधिनियम (पोटा)के विशेष न्यायाधीश एम. आर. पौराणिक ने मोहम्मद हनीफ सईद, उसकी पत्नी फहमीदा एम.एच.सईद और उनके साथी अशरत शफीक अंसारी को सजा-ए मौत सुनाई।
अशरत के वकील एस. कुंजुरामन ने कहा कि उनका मुवक्किल बेकसूर है और वह अदालत के इस फैसले को बंबई हाईकोर्ट में चुनौती देंगे।
छह साल तक चली इस मामले की सुनवाई के बाद अदालत ने 10 दिन पहले ही इन तीनों को 25 अगस्त 2003 को गेटवे ऑफ इंडिया और झावेरी बाजार में हुए विस्फोटों के मामले में दोषी करार दिया था।
विशेष लोक अभियोजक उज्जवल निकम ने बताया कि आतंकवादी संगठन लश्कर-ए तैयबा के सदस्य कहलाने वाले इन तीनों व्यक्तियों को पोटा और भारतीय दंड संहिता की धाराओं के तहत दोषी ठहराया गया है।
निकम ने कहा, "यह महत्वपूर्ण फैसला है। इन्हीं 'शैतानों' की वजह से 54 लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा था और 244 लोग घायल हो गए थे।"
दोषियों को मृत्युदंड दिए जाने के लिए दलील देते हुए निकम ने कहा कि उनका इरादा गेटवे ऑफ इंडिया के पास चहल-कदमी करते विदेशी पर्यटकों और प्रसिद्ध महालक्ष्मी मंदिर को निशाना बनाने का था। हालांकि उनकी गाड़ी खराब हो गई और दूसरा विस्फोट झावेरी बाजार में हो गया।
बचाव पक्ष के वकीलों-हनीफ के वाहेब खान, फहमीदा के वकील सुदेश पासगोला, अशरत के वकील एस. कुंजुरामन ने कहा कि उनके मुवक्किल बेकसूर हैं।
निकम ने पिछले सप्ताह कहा था, "लश्कर-ए तैयबा के लिए यह बड़ा झटका है और पहली बार भारत में कोई परिवार आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम देने का दोषी ठहराया गया है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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