अलग एसजीपीसी के मसले पर प्रधानमंत्री से हस्तक्षेप की अपील
एसजीपीसी ने इस मसले पर आगामी 10 और 14 अगस्त को आपात बैठक बुलाई है।
एसजीपीसी के अध्यक्ष अवतार सिंह मक्कड़ ने गुरुवार को संवाददाताओं से चर्चा में कहा, "सरकार इस मसले को गंभीरता से नहीं ले रही है। आज हम प्रधानमंत्री से फिर से अपील करते हैं कि इस मामले में हस्तक्षेप करें। हमनें 10 और 14 अगस्त को आगे की कार्रवाई के लिए कार्यकारी समिति और सामान्य निकायों की बैठक बुलाई है।"
उन्होंने दावा किया, "हरियाणा में रहने वाले सिखों और वहां की सभी गुरुद्वारा समितियों का हमें पूरा समर्थन है। लंबे संघर्ष के बाद एसजीपीसी का गठन किया गया था। हम इसके गठन के उद्देश्यों को खत्म करने की अनुमति नहीं देंगे।"
इस मसले को लेकर आज संसद के दोनों सदनों में शिरोमणि अकाली दल (एसएडी) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सदस्यों ने हंगामा किया।
उल्लेखनीय है कि हरियाणा के मुख्यमंत्री भूपिंदर सिंह हुड्डा ने गत शुक्रवार को कहा था कि हरियाणा में संभवत: अलग एसजीपीसी का गठन किया जाएगा। उन्होंने कहा था कि अलग एसजीपीसी के गठन की घोषणा एक नवम्बर को की जा सकती है। एक नवम्बर को ही वर्ष 1966 में पंजाब से अलग कर हरियाणा को अलग राज्य का दर्जा दिया गया था। उन्होंने कहा था कि इसमें कोई कानूनी अड़चन नहीं है।
हुड्डा के इस बयान को लोगों को गुमराह करने वाला बताते हुए मक्कड़ ने कहा, "हुड्डा ने यह गलत कहा है कि उन्हें लाखों ऐसे शपथ पत्र मिले हैं जिनमें हरियाणा के सिखों ने अलग संस्था के गठन की मांग की है। कुछ चंद लोग ऐसे हैं जो ऐसा चाहते हैं। ऐसे गैरजिम्मेदाराना बयान के लिए हुड्डा को गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।"
मक्कड़ ने कहा कि वह इस मुद्दे पर चर्चा के लिए पूर्व में भी दो दफा प्रधानमंत्री से मिल चुके हैं लेकिन उसका कोई फायदा नहीं हुआ।
उन्होंने कहा, "प्रधानमंत्री से दो बार मिलने के साथ-साथ मैंने उन्हें चार बार पत्र भी लिखा। एक बार तो उन्होंने हुड्डा को बुलाया और उन्हें यह मामला खत्म करने को भी कहा। लेकिन फिर भी कुछ नहीं हुआ। प्रधानमंत्री खुद सिख हैं और इस नाते उन्हें इस मुद्दे को प्राथमिकता से लेना चाहिए।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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