बिहार में कई नदियों में जल स्तर खतरे के निशान के ऊपर (लीड-1)
सीतामढ़ी जिले के कई गांवों में हालांकि बाढ़ का पानी अब भी फैला हुआ है जहां राहत एवं बचाव कार्य जारी है।
नेपाल के तराई क्षेत्रों में हो रही लगातार बारिश के कारण बिहार की प्रमुख नदियों में पानी बढ़ रहा है। बागमती समेत कमला बलान और बूढ़ी गंडक कई स्थानों पर खतरे के निशान को पार कर गई हैं।
जल संसाधन विभाग द्वारा पटना में बनाए गए बाढ़ नियंत्रण कक्ष में पदस्थापित कार्यपालक अभियंता मनोज कुमार ने गुरुवार को बताया कि बागमती नदी सीतामढ़ी के सोनाखान में 68.70 मीटर तथा डूबाधार में 62़13 मीटर खतरे के निशान से ऊपर बह रही है।
इसी तरह बूढ़ी गंडक समस्तीपुर में 44.45 मीटर, रोसड़ा में 41.31 मीटर और खगड़िया में 34.58 मीटर खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। इसके अलावा कमला बलान झंझारपुर और जयनगर में खतरे के निशान को पार कर गई हैं। उन्होंने बताया कि इन सभी नदियों में पानी बढ़ने का सिलसिला लगातार जारी है।
कुमार के मुताबिक गंडक नदी के वाल्मीकीनगर स्थित बैराज सें गुरुवार को चार बजे 209500 क्यूसेक जलस्राव हो रहा था जबकि कोसी नदी के बीरपुर बैराज से 199175 क्यूसेक जलस्राव जारी था। उन्होंने बताया कि नेपाल के तराई क्षेत्रों में हो रही बारिश के कारण बिहार के नदियों में पानी बढ़ने का सिलसिला जारी है।
तटबंध टूट जाने के कारण बिहार के सीतामढ़ी तथा मुजफ्फरपुर जिले के करीब 200 गांवों में बाढ़ का पानी घुस गया था।
सीतामढ़ी के जिलाधिकारी अंजनी कुमार वर्मा ने गुरुवार को बताया कि तिलकताजपुर गांव के समीप बागमती नदी के क्षतिग्रस्त तटबंध के मरम्मत का कार्य पूरा हो गया है। उन्होंने बताया कि मरम्मत का कार्य पूरा होने के बाद तटबंध से जलस्राव पूरी तरह रुक गया है।
बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत एवं बचाव कार्य युद्घस्तर पर चलाए जा रहे हैं। आपदा प्रबंधन विभाग के विशेष सचिव सत्येन्द्र ने गुरुवार को बताया कि बागमती तटबंध टूटने के बाद बाढ़ से घिरे लोगों के बीच राहत एवं बचाव कार्य युद्धस्तर पर चलाए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि बाढ़ पीड़ितों के बीच अब तक 320 क्विंटल खाद्यान्न और एक लाख 20 हजार रुपये नकद बांटे गए हैं। बाढ़ पीड़ितों के लिए दो राहत शिविर खोले गए हैं। इसके अतिरिक्त सात अस्थायी शौचालय, छह मेडिकल कैम्प तथा चार चापाकल की व्यवस्था की गई है।
सत्येन्द्र के मुताबिक प्रभावित लोगों के बीच 8266 पॉलिथीन शीट्स, 311 क्विंटल चूड़ा, 40 क्विंटल गुड़ और 3000 माचिस वितरित किए गए हैं।
मुजफरपुर जिले के बाढ़ प्रभावित इलाकों से पानी कम होने के समाचार मिल रहे हैं। जिला प्रशासन का दावा है कि सभी बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत कार्य चलाए जा रहे हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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