अलग एसजीपीसी के गठन का संसद में भारी विरोध (लीड-2)

अकाली दल के वरिष्ठ नेता रतन सिंह अजनाला ने गुरुवार को केंद्र सरकार को चेतावनी दी कि धार्मिक संस्थाओं में किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

इससे पहले, लोकसभा में अजनाला और उनकी ही पार्टी की सदस्य हरसिमरत कौर ने यह मामला उठाया। भाजपा और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के अन्य घटक दलों ने इस मुद्दे पर अकाली सदस्यों का जोरदार समर्थन किया। हंगामे के बीच ही अजनाला और कौर लोकसभा अध्यक्ष के आसन के करीब आ गए और बैठ गए तथा नारेबाजी करने लगे। अजनाला ने कहा कि इस मसले पर जब तक उन्हें न्याय नहीं मिलेगा वे यहीं बैठे रहेंगे।

विपक्षी सदस्यों ने इस मसले पर प्रश्नकाल स्थगित कर चर्चा की मांग की लेकिन लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने इसे अस्वीकार कर किया।

उन्होंने सदस्यों से आग्रह किया कि वे प्रश्नकाल चलने दें और इस मुद्दे को शून्यकाल में उठाए। लेकिन भाजपा व अकाली सदस्यों ने हंगामा जारी रखा। इसके चलते उन्होंने लोकसभा की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक स्थगित कर दी।

दूसरी बार सदन की कार्यवाही आरंभ होते ही अध्यक्ष ने जरूरी कामकाज निपटाए। इसके बाद भाजपा और अकाली सदस्यों ने फिर से इस मसले पर हंगामा आरंभ कर दिया।

विपक्ष के नेता लालकृष्ण आडवाणी ने अध्यक्ष से आग्रह किया, "महंगाई के विषय पर चर्चा होनी है इसलिए मेरा आपसे आग्रह है कि अजनाला जी को आप बोलने का मौका दें।" लोकसभा अध्यक्ष ने आडवाणी के आग्रह को स्वीकार करते हुए अजनाला को मौका दिया।

इस मुद्दे पर अपनी पार्टी का पक्ष रखते हुए अजनाला ने कहा कि अलग एसजीपीसी के गठन की घोषणा बहुत ही गलत कदम है। एसजीपीसी एक धार्मिक संस्था है। सिखों की धार्मिक भावनाएं इससे जुड़ी है।

केंद्र सरकार को चेतावनी देते हुए उन्होंने कहा, "अलग एसजीपीसी के गठन को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। ऐसे किसी भी प्रयास का जोरदार विरोध होगा। हमें लड़ना आता है। हमारी बात नहीं मानी गई तो हम इसके लिए भी तैयार हैं।"

उधर, राज्यसभा में सुबह 11 बजे सदन की कार्यवाही आरंभ होते ही नए सदस्यों को शपथ दिलाने के बाद अकाली दल और भाजपा तथा निर्दलीय तरलोचन सिंह ने इस मसले को उठाया और प्रश्नकाल स्थगित कर इस पर चर्चा की मांग की।

भाजपा के एस. एस. अहलूवालिया ने कहा कि यह बहुत गंभीर मामला है। यह लोगों की धार्मिक भावनाओं से जुड़ा है। इसलिए सदन में पहले इस विषय पर चर्चा होनी चाहिए।

सभापति हामिद अंसारी ने सदस्यों से आग्रह किया कि वे प्रश्नकाल चलने दें और उसके बाद इस मसले को उठाए लेकिन भाजपा और अकाली सदस्यों ने इस पर हंगामा आरंभ कर दिया जिसके चलते सभापति ने सदन की कार्यवाही 12 बजे तक स्थगित कर दी।

इसके बाद जैसे ही सदन की कार्यवाही दूसरी बार आरंभ हुई भाजपा और अकाली सदस्यों ने फिर से इसी मुद्दे पर हंगामा आरंभ कर दिया। हंगामा न थमते देख सभापति ने सदन की कार्यवाही एक बजे तक स्थगित कर दी।

उल्लेखनीय है कि हरियाणा के मुख्यमंत्री भूपिंदर सिंह हुड्डा ने गत शुक्रवार को घोषणा की थी कि एक नवम्बर को हरियाणा में अलग एसजीपीसी का गठन किया जाएगा।

हरियाणा में सात प्रमुख और ऐतिहासिक गुरुद्वारे हैं। ये सभी अमृतसर स्थित एसजीपीसी के सीधे नियंत्रण में हैं जबकि राज्य के 18 अन्य गुरुद्वारों पर भी अप्रत्यक्ष तौर पर एसजीपीसी का ही नियंत्रण है। एसजीपीसी ही सिख धर्म से जुड़े मामलों और गुरुद्वारों को नियंत्रित करती है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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