फर्जी थी रनबीर मुठभेड़: सीबीआई

पुलिस अधीक्षक नीलाभ किशोर की अगुवाई में चल रही इस जांच में यह पाया गया है कि गत तीन जुलाई को देहरादून में हुई मुठभेड़ जिसमें रनबीर सिंह की मौत हो गई थी, वो फर्जी थी। यह जांच लखनऊ स्थिति सीबीआई कार्यालय का एक विशेष जांच दल कर रहा है।
उल्लेखनीय है कि 22 वर्षीय रनबीर सिंह की 3 जुलाई को पुलिस मुठभेड़ में मौत हो गई थी। देहरादून पुलिस ने उस दौरान रनबीर को अपराधी घोषित कर कहा था कि मुठभेड़ के दौरान वो दरोगा की रिवॉल्वर छीनकर भाग रहा था। तभी पुलिस ने उस पर गोलियां चलाईं।
रनबीर को काफी करीब से गोली मारी गई
इस घटना पर तमाम सवाल उठे। राजनीति हुई और सीधे उत्तराखंड पुलिस को घेरे में ले लिया गया। रनबीर के परिवारजनों ने पुलिस पर हत्या का आरोप लगाया था। बाद में सरकार ने इस मुठभेड़ की सीबीआई जांच के आदेश दिए। तभी एक अगस्त को 1 अगस्त को मौके का मुआयना करने और लोगों से पूछताछ में सीबीआई ने पाया कि प्रारंभिक जांच में मिले सबूत में यही साबित होता है कि पुलिस मुठभेड़ फर्जी थी।
रनबीर के शरीर पर गोलियों के 12 निशान पाए गए। सभी निशान काफी गहरे थे। जांच में पाया गया है कि रनबीर को काफी करीब से गोली मारी गई। यही नहीं दरोगा की उस रिवॉल्वर से गोली ही नहीं चली, जिसके बारे में पुलिस ने जिक्र किया था। इसके अलावा उसके शरीर पर चोटों के भी 27 निशान पाए गए, जिससे पता चलता है कि उसे मारने से पहले यातना दी गई। रनबीर की हत्या के मामले में उत्तराखंड के 14 पुलिसकर्मियों पर मुकदमा चल रहा है।


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