ईरान में 'दमन और दहशत' का प्रत्यक्ष गवाह है एक जूझारू ब्लॉगर

समाचार एजेंसी डीपीए के मुताबिक 23 वर्षीय हामिद रजा खोशनया को इसी जुझारूपन और अभिव्यक्ति की आजादी के प्रति प्रतिबद्धता की वजह से अपना वतन छोड़ना पड़ा। आज हामिद अपने पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान में पनाह लिए हुए है।

इस्लामाबाद में हामिद ने एक साक्षात्कार में कहा, "मैं तेहरान के उपनगरीय इलाके में स्थित अपने मित्र के आवास में 25 दिनों तक छिपा रहा। पाकिस्तान भागने के इंतजाम होने के बाद ही मैं वहां से निकला।"

हामिद ने तस्करों को 3,000 डॉलर दिए और कंटेनर में बैठकर ईरान के बलूचिस्तान-सिस्तान प्रांत पहुंचा। वहां एक मोटरसाइकिल पर सवार होकर वह पाकिस्तान की सीमा में स्थित मानडेलो गांव पहुंच गया।

उसने कहा, "मैं मोटरसाइकिल पर पीछे बैठा। मैंने खुद को चालक के पीछे छुपा लिया था। मैं रास्ते में खुदा से दुआ मांगता रहा कि जल्द से जल्द सीमा पार लूं। आप जानते हैं कि ईरान-पाकिस्तान सीमा पर खड़े सुरक्षाकर्मी हमें गोली मार सकते थे।"

हामिद का ताल्लुक एक शिक्षित और संपन्न परिवार से है। सरकार के खिलाफ गतिविधियों में शामिल होने के आरोप में उसे विश्वविद्यालय से भी निकाल दिया गया था।

विरोध प्रदर्शनों के दौरान जब ईरानी सरकार ने विदेशी मीडिया पर प्रतिबंध लगा दिया था तो उस दौरान हामिद ने सीएनएन और बीबीसी को सूचनाओं के साथ तस्वीरें और वीडियो उपलब्ध करवाए।

तेहरान में विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस की बर्बरता को वह आज भी याद करता है। उसका कहना है, "मुझे और लगभग 500 लोगों को पुलिस ने अमीराबाद स्ट्रीट पर घेर लिया। पहले लाठियां बरसाईं गईं और फिर निहत्थे प्रदर्शनकारियों पर अंधाधुंध फायरिंग की गई।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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