पूर्वजों की खोज में बिहार पहुंचा लंदन का एक परिवार
जैन्स के मुताबिक उनके पिता चार दशक पहले ब्रिटेन जाकर बस गए थे लेकिन अब उन्हें मातृभूमि और पूर्वजों की याद एक बार फिर जमालपुर खींच लाई है।
50 साल के जैन्स ने बताया कि उनके पूर्वज राधामोहन कभी जमालपुर में स्थित रेल फैक्टरी में काम किया करते थे। पूर्वजों की धुंधली यादों में जीने वाले जैन्स के मुताबिक यह बात 19वीं शताब्दी की शुरुआत की है।
जैन्स ने आईएएनएस को बताया, "मेरे पिता अल्बर्ट लुइस स्वाधीनता से पहले एक अंग्रेज अधिकारी के साथ ब्रिटेन चले गए थे। मेरे पिता ने लंदन में ही बसने का फैसला किया था। इस बीच हम भारत में रहने वाले अपने रिश्तेदारों के साथ संपर्क नहीं बना सके। अब हम उनके बारे में जानना चाहते हैं और हमारे यहां आने का मकसद भी यही है।"
रैन्स ने बताया कि वह दो-तीन दिनों में सरकारी अधिकारियों से मिलकर बिहार में रहने वाले अपने पूर्वजों को तलाशने का प्रयास करेंगे। जैन्स ने कहा, "भारतीय मूल का होने के कारण ही हम आज टूटी-फूटी हिंदी बोल रहे हैं। आने वाले दिनों में हम अपने पूर्वजों की खोज करेंगे।"
जैन्स के परिवार को जमालपुर की रेल फैक्टरी के बारे में अधिक जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा, "हमारी आस तो बिहार पर टिकी है क्योंकि हमारे दादा यहां जन्मे और मर गए। हमें यकीन है कि एक दिन हम अपने रिश्तेदारो को खोजने में सफल रहेंगे।"
जैन्स के पुत्र विक्टर लुइस ने कहा कि काफी प्रयास के बाद भी पूर्वजों का पता नहीं लगा पाने के कारण वह और उनके पिता थोड़े निराश हो गए हैं।
विक्टर ने कहा, "हमने अपने परदादा के बारे में जानकारी हासिल करनी चाही लेकिन हम उनके निवास और अन्य चीजों के बारे में अब तक कोई जानकारी प्राप्त नहीं कर पाए हैं।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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