हर्षोल्लास के साथ मनाया राखी का त्योहार
श्रावण महीने की पूर्णिमा को मनाया जाने वाला रक्षा बंधन का त्योहार देश भर में भारी उल्लास के साथ मनाया जाता है।
मान्यता के अनुसार बहनें सुबह से लेकर तब तक व्रत रखती हैं, जब तक वे अपने भाइयों की कलाइयों में राखी नहीं बांध लेतीं। वे इसके लिए एक थाली में मिट्टी या धातु का एक दीपक, राखी, रोली, कुमकुम, अक्षत, मिठाइयां औैर फल सजाती हैं।
बहन अपने भाई की आरती उतारती है, राखी बांधती है, माथे पर तिलक लगाती है और मिठाई खिलाती है। इसके बदले में भाई अपनी बहन को उपहार प्रदान करता है और जीवनभर उसकी रक्षा के लिए संकल्प लेता है।
बहुत सारे लोगों ने इस वर्ष इस त्योहार को शाम को मनाने का निर्णय लिया, क्योंकि पुरोहितों के अनुसार रक्षा बंधन के लिए शाम को सबसे पवित्र मुहूर्त था।
दिल्ली के लक्ष्मी नारायण मंदिर के प्रमुख आचार्य रवींद्र नागर ने कहा, "रक्षा बंधन के लिए पवित्र मुहूर्त अपराह्न् पांच बजे के बाद से है और यदि संभव हो तो भाई-बहन इस त्योहार को शाम को ही मनाएं। लेकिन इसके पहले भी राखी बांधने में कोई नुकसान नहीं है।"
रक्षा बंधन के कारण दिल्ली में सड़कों पर भारी भीड़ देखी गई। तमाम महिलाओं व पुरुषों को आकर्षक वस्त्रों में बाजारों में राखियों और मिठाइयों की खरीदारी करते हुए देखा गया।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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