मध्य प्रदेश में भूसे और डंठल से बनेगी बिजली

यह संयंत्र कटनी के ग्राम गुडर में एएसएन इंडस्ट्ररीज प्राइवेट लिमिटेड द्वारा 30 करोड़ की लागत से स्थापित किया जा रहा है। 12 एकड़ क्षेत्र में स्थापित होने वाले इस संयंत्र में आधुनिक तकनीक से बिजली तैयार करने के लिए किसानों के खेतों से निकलने वाले मक्के के डंठल, धान व गेंहू की भूसी का इस्तेमाल किया जाएगा। ईंधन के लिए 85 प्रतिशत जैविक पदार्थ तथा 15 प्रतिशत कोयले का उपयोग किया जाएगा।

सरकारी जानकारी के मुताबिक आसपास के क्षेत्रों में किसी तरह का प्रदूषण न फैले इसके लिए 41 मीटर ऊंची चिमनी बनाई जा रही है। इतना ही नहीं पर्यावरण को ध्यान में रखकर वृक्षारोपण भी किया गया है। इस संयंत्र में प्रतिदिन 180 टन बायोमास तथा 30 टन कोयले की खपत का अनुमान है। इस संयंत्र से प्रतिदिन 47 टन राख निकलेगी, जिसका उपयोग सीमेंट फैक्ट्री तथा ईटों के निर्माण में किया जाएगा।

संयंत्र को प्रतिदिन 160 अकुशल श्रमिकों की जरूरत होगी जिसकी स्थानीय स्तर पर पूर्ति की जाएगी। इसके अलावा किसानों को फसलों के अपशिष्ट पदार्थो के दाम भी हासिल होंगे।

बायोमास पावर प्लान्ट को महानदी से पानी उपलब्ध कराया जाएगा। इस संयंत्र को प्रतिदिन 1080 घन मीटर पानी की जरूरत होगी। संयंत्र द्वारा महानदी के पानी का उपयोग करने से क्षेत्र के किसानों को फसल की सिंचाई के लिए पानी की कमी न पड़े इसका भी ध्यान रखा गया है। संयंत्र से बाहर निकलने वाले पानी को फसलों की सिंचाई के लिए पूरी तरह सुरक्षित रखा जाएगा।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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