'खबर लहरिया' को संयुक्त राष्ट्र का साक्षरता पुरस्कार (राउंडअप)
दक्षिण कोरिया ने वर्ष 1989 में यूनेस्को में 'किंग सिजोंग साक्षरता पुरस्कार' की शुरुआत की थी। इस पुरस्कार के तहत प्रत्येक विजेता को 20,000 डॉलर की राशि प्रदान की जाती है।
'खबर लहरिया' सहित चारों विजेताओं को 'किंग सिजोंग साक्षारता पुरस्कार' आठ सितंबर को अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस के अवसर पर पेरिस स्थित यूनेस्को के मुख्यालय में प्रदान किया जाएगा।
उत्तर प्रदेश में 20,000 से अधिक पाठकों के बीच पहुंचने वाला यह साप्ताहिक समाचार पत्र (खबर लहरिया) पिछड़े वर्ग की नवसाक्षर महिलाओं द्वारा प्रकाशित किया जाता है। इस समाचार पत्र की शुरुआत नई दिल्ली और उत्तर प्रदेश में काम करने वाली एक संस्था 'निरंतर' ने की थी।
उत्तर प्रदेश के चित्रकूट और बांदा जिले में 'खबर लहरिया' महिलाओं को पत्रकारिता का भी प्रशिक्षण देता है।
संयुक्त राष्ट्र द्वारा साक्षरता पुरस्कार के लिए चुने जाने से उत्साहित देश के ग्रामीण इलाके से पूरी तरह महिलाओं द्वारा प्रकाशित साप्ताहिक समाचार पत्र 'खबर लहरिया' अब देश के अन्य हिस्सों में भी अपने विस्तार की योजना बना रहा है।
इस सम्मान से उत्साहित निरंतर से जुड़ी शालिनी जोशी ने कहा, "यह पुरस्कार हमारे काम को प्रामाणित करता है। यह हमारी विश्वसनीयता को प्रामाणित करता है।"
जोशी ने आईएएनएस को बताया, "अब हम बिहार के तीन जिलों से भी 'खबर लहरिया' के प्रकाशन की योजना बना रहे हैं। ग्रामीण महिलाओं के सशक्तिकरण का विचार अब फैल रहा है।"
इस समाचार पत्र में 15 महिलाएं काम करती हैं। इन महिलाओं को निरंतर ने पत्रकार के रूप में प्रशिक्षित किया है। इसके मुख्य दल में पांच महिलाएं शामिल हैं।
जोशी ने कहा, "अब इस समाचार पत्र के लिए हमारे पास युवा संवाददाता हैं।"
खबर लहरिया में राजनीति, अपराध, सामाजिक मुद्दों और मनोरंजन से जुड़ी खबरें प्रकाशित की जाती हैं। बुंदेलखंड के पाठकों के लिए इसे स्थानीय बुंदेलखंडी बोली में प्रकाशित किया जाता है।
संस्था की वेबसाइट के अनुसार इस समाचार पत्र की शुरुआत मई 2002 में चित्रकूट से हुई थी और अक्टूबर 2006 में पड़ोस के बांदा जिले में इसके दूसरे संस्करण की शुरुआत की गई थी। बुंदेलखंड के पाठकों के लिए इसे स्थानीय बुंदेलखंडी बोली में प्रकाशित किया जाता है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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