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सीतामढ़ी में बागमती के तटबंध की मरम्मत का कार्य युद्धस्तर पर (लीड-2)

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इस बीच बागमती मंगलवार को भी कई स्थानों पर खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। जल संसाधन विभाग द्वारा पटना में बनाए गए बाढ़ नियंत्रण कक्ष के अनुसार बागमती सीतामढ़ी के रूनीसैदपुर तथा बेनीबाद में खतरे के निशान से ऊपर बह रही है।

राज्य के जल संसाधन मंत्री विजेन्द्र प्रसाद यादव ने मंगलवार को बताया कि सीतामढ़ी में बागमती के टूटे तटबंध की मरम्मत का कार्य वरिष्ठ अभियंताओं की देखरेख में युद्धस्तर पर कराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अगर क्षेत्र में बारिश नहीं हुई तो दो दिन के अंदर तटबंध की मरम्मत का कार्य पूरा कर लिया जाएगा।

उन्होंने बताया कि तटबंध के निर्माण की जांच के लिए एक चार सदस्यों की समिति बनाई गई है जो तटबंध के निर्माण में हुई कथित गड़बड़ियों की जांच करेगी। उन्होंने बताया कि तटबंध निर्माण में गड़बड़ी करने वालों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा।

उधर, बाढ़ नियंत्रण कक्ष में पदस्थापित सहायक अभियंता दीपक कुमार ने मंगलवार को बताया कि दोपहर तीन बजे मिली रिपोर्ट के मुताबिक सीतामढ़ी के रूनीसैदपुर में बागमती खतरे के निशान से 1़89 मीटर तथा मधुबनी के बेनीबाद में खतरे के निशान से 0.61 मीटर उपर बह रही है। उन्होंने बताया कि बिहार की शेष प्रमुख नदियां खतरे के निशान के पास ही बह रही हैं।

इधर, वाल्मिकीनगर स्थित बैराज में गंडक के जलस्राव में उतार-चढ़ाव जारी है। उन्होंने बताया कि नेपाल के तराई क्षेत्र में हो रही बारिश के कारण बिहार की नदियों के जलस्राव में लगातार परिवर्तन देखा जा रहा है।

कोसी नदी के भी जलस्राव में सोमवार के मुकाबले कमी देखी जा रही है। बीरपुर बैराज के अधीक्षण अभियंता एम.एफ.हमीद के अनुसार बैराज के नीचे मंगलवार को चार बजे तक कोसी नदी का जलस्राव 113565 क्यूसेक था जबकि सोमवार की सुबह उसका जलस्राव 117737 क्यूसेक था।

जल संसाधन विभाग के एक अधिकारी की माने तो विभाग खुद इस बात हैरान है कि मात्र 500 से 1000 क्यूसेक जलस्राव में ही बागमती का यह तटबंध कैसे टूटा। जबकि उसकी क्षमता कई लाख क्यूसेक जलस्राव सहने की है। विभाग ने अपने स्तर पर भी इसकी छानबीन प्रारंभ कर दी है।

इस बीच, आपदा प्रबंधन विभाग के प्रधान सचिव ने मंगलवार को बताया कि सीतामढ़ी जिले को बाढ़ राहत कार्य के लिए छह करोड़ रुपये उपलब्ध करा दिए गए हैं। उन्होंने दावा किया कि राहत कार्य युद्धस्तर पर चलाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि रूनीसैदपुर में दो स्थानों पर विशेष राहत शिविर चलाए जा रहे हैं।

सीतामढ़ी के जिलाधिकारी अंजनी कुमार वर्मा ने मंगलवार को बताया कि 103 गांवों में से करीब 30 से 40 गांवों में बाढ़ का पानी कम हुआ है। इस कारण वहां की स्थिति में सुधार आ रहा है। उन्होंने बताया कि बाढ़ प्रभावित इलाकों में अभी भी राष्ट्रीय आपदा राहत बल (एनडीआरएफ) के जवान दो दर्जन मोटर बोटों के साथ राहत एवं बचाव कार्य में जुटे हुए हैं।

उन्होंने बताया कि मंगलवार से रूनीसैदपुर प्रखंड कार्यालय में बाढ़ प्रभावित लोगों को राहत सामग्री बांटने के लिए छह काउंटर बना दिए गए हैं जिसकी जिम्मेवारी आठ प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) को सौंप दिया गया है।

वर्मा ने बताया कि बाढ़ प्रभावित प्रत्येक परिवार को 50 किलोग्राम गेहूं तथा 50 किलोग्राम चावल तथा 250 रुपये दिए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि टूटे हुए तटबंध की मरम्मत का कार्य भी युद्धस्तर पर चल रहा है।

इस बीच मुजफ्फरपुर जिले में बाढ़ का पानी गांवों से निकलने की सूचना है। मुजफ्फरपुर के जिलाधिकारी विपिन कुमार के मुताबिक राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-77 तथा 110 पर भी पानी कम हो गया है। इस कारण इन सड़कों पर छोटे वाहनों का आवागमन प्रारंभ कर दिया गया है।

उन्होंने बताया कि बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत कार्य युद्धस्तर पर चल रहे हैं और अगर बारिश नहीं हुई या बागमती नदी के जलस्राव में बढ़ोतरी नहीं हुई तो स्थिति जल्द सामान्य हो जाएगी।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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