पुरस्कार के बाद 'खबर लहरिया' के विस्तार की योजना
उत्तर प्रदेश में 20,000 से अधिक पाठकों के बीच पहुंचने वाला यह साप्ताहिक समाचार पत्र (खबर लहरिया) नवसाक्षर पिछड़े वर्ग की महिलाओं द्वारा प्रकाशित किया जाता है। इस समाचार पत्र की शुरुआत नई दिल्ली और उत्तर प्रदेश में काम करने वाली एक संस्था 'निरंतर' ने 2002 में की थी। उत्तर प्रदेश के चित्रकूट और बांदा जिले में 'खबर लहरिया' महिलाओं को पत्रकारिता का भी प्रशिक्षण देता है।
इस साप्ताहिक समाचार पत्र के अनूठे प्रयास पर गौर करते हुए संयुक्त राष्ट्र शैक्षणिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन (यूनेस्को) की ओर से इसे 'किंग सिजोंग साक्षारता पुरस्कार' के लिए चुना गया है।
इस सम्मान से उत्साहित निरंतर से जुड़ी शालिनी जोशी ने कहा, "यह पुरस्कार हमारे काम को प्रामाणित करता है। यह हमारी विश्वसनीयता को प्रामाणित करता है।"
जोशी ने आईएएनएस को बताया, "अब हम बिहार के तीन जिलों से भी 'खबर लहरिया' के प्रकाशन की योजना बना रहे हैं। ग्रामीण महिलाओं के सशक्तिकरण का विचार अब फैल रहा है।"
इस समाचार पत्र में 15 महिलाएं काम करती हैं। इन महिलाओं को निरंतर ने पत्रकार के रूप में प्रशिक्षित किया है। इसके मुख्य दल में पांच महिलाएं शामिल हैं।
जोशी ने कहा, "अब इस समाचार पत्र के लिए हमारे पास युवा संवाददाता हैं।"
खबर लहरिया में राजनीति, अपराध, सामाजिक मुद्दों और मनोरंजन से जुड़ी खबरें प्रकाशित की जाती हैं। बुंदेलखंड के पाठकों के लिए इसे स्थानीय बुंदेलखंडी बोली में प्रकाशित किया जाता है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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