गरीबी की मार ने महिला एथलीट को वेश्यावृत्ति अपनाने को किया मजबूर
खेल जगत को हैरान और किसी भी संवेदनशील इनसान को परेशान कर देने वाली इस घटना ने सरकार की खेल नीति को भी सरेआम नंगा कर दिया है। यह घटना छत्तीसगढ़ की है, जहां यह बेबस और बदनसीब महिला एथलीट वेश्यावृति के आरोप में पिछले चार दिनों से पुलिस हिरासत में है। उसकी जमानत याचिका भी स्वीकार हो गई है लेकिन जमानत के लिए आवश्यक रकम उसके पास नहीं है।
26 वर्षीय निशा शेट्टी यूं तो असम की रहने वाली है लेकिन पिछले दिनों एक व्यवसायी के साथ हुए सौदे के तहत वह मुंबई से रायपुर आई थी। इस सौदे के मुताबिक निशा को व्यवसायी के साथ 15 दिनों तक रहने के लिए 50,000 रुपये मिलने थे।
इस मामले की जांच कर रहे रायपुर के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक शशिमोहन सिंह ने आईएएनएस से बातचीत में कहा, "निशा को अन्य दो महिलाओं के साथ 31 जुलाई को देवेन्द्रनगर इलाके से हिरासत में लिया गया था। उसने पुलिस को बताया है कि गरीबी के चलते उसे वेश्यावृत्ति के पेशे में आना पड़ गया।"
मिली जानकारी के मुताबिक निशा ने वर्ष 1998 के राष्ट्रीय खेलों में बतौर एथलीट रजत पदक जीता था। उसने जांच अधिकारी के समक्ष कहा है कि उसके पति सुनील शेट्टी भी खिलाड़ी थे। किडनी की समस्याओं के कारण 2007 में उनकी मौत हो गई। तब से वह कर्ज के बोझ तले दबी हुई है।
कर्ज का बोझ कम करने तथा अपना और अपनी पांच वर्षीय बेटी का पेट पालने के लिए निशा को मजबूरन इस पेशे से जुड़ना पड़ा।
इस घटना ने समूचे खेल जगत को हैरान कर दिया है। बहरहाल, राज्य के खेल समुदाय से जुड़े लोग निशा की मदद को आगे आने लगे है।
छत्तीसगढ़ ओलंपिक संघ के संरक्षक विधान मिश्रा ने आईएएनएस से बातचीत में कहा, "एक ऐसी लड़की, जिसे दुर्भाग्यवश वेश्यावृत्ति के पेश में उतरना पड़ा, उसकी सहायता करना मेरा नैतिक कर्तव्य है।"
उन्होंने कहा, "खेल जगत के लिए यह शर्म कि बात है कि गरीबी से पार पाने के लिए एक लड़की को वेश्यावृत्ति के धंधे में उतरना पड़ा। यह सरकार की आंखें खोल देने वाली घटना है, जिसके पास राष्ट्रीय स्तर के खेलों में इतना अच्छा प्रदर्शन कर चुके व आर्थिक रूप से कमजोर खिलाड़ियों के लिए कोई नीति नहीं है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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