गुरुवार को सुनाई जाएगी मुंबई दोहरे बम कांड के दोषियों को सजा (लीड-1)
मुंबई, 4 अगस्त (आईएएनएस)। मुंबई में अगस्त 2003 में हुए दोहरे बम कांड के तीनों दोषियों को अब गुरुवार को सजा सुनाई जाएगी। आतंकवाद निरोधक अधिनियम (पोटा) की विशेष अदालत ने इस संबंध में फैसला गुरुवार तक सुरक्षित रखा है। इस बम कांड में 54 लोग मारे गए थे।
विशेष लोक अभियोजक उज्जवल निकम और बचाव पक्ष के वकीलों के बीच चार घंटे तक चली बहस के अंत में पोटा अदालत के विशेष न्यायाधीश एम. आर. पुराणिक ने यह फैसला सुनाया। पोटा की अदालत इस मामले में मोहम्मद हनीफ सईद, उसकी पत्नी फहमिदा एम. एच. सईद और उसके सहयोगी अशरत शफीक अंसारी को पहले ही दोषी ठहरा चुकी है।
दोषियों को फांसी की सजा दिए जाने की मांग करते हुए निकम ने कहा कि तीनों ने आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के लिए काम किया है और सबसे घृणित अपराध को अंजाम दिया है।
निकम की मांग का विरोध करते हुए बचाव पक्ष के वकीलों वहाब खान (हनीफ), सुदेश पसगोला (फहमिदा) और कुंजुरमन (अशरत) ने दावा किया कि उनके मुवक्किल निर्दोष हैं।
खान और कुंजुरमन ने पहले ही अपनी मंशा जाहिर कर चुके हैं कि वे अदालत के फैसले को बॉम्बे उच्च न्यायालय में चुनौती देंगे।
कुंजुरमन ने आईएएनएस से बातचीत में कहा, "यह आधारहीन और अर्थहीन निर्णय है। मेरे मुवक्किल के खिलाफ एक भी सबूत नहीं है जो उसे दोषी साबित कर सके। मैं बॉम्बे उच्च न्यायालय जाऊंगा।"
खान ने आईएएनएस से बातचीत में कहा, "यह दुर्लभ मामलों में भी दुर्लभतम का मामला नहीं है। इसलिए यह मौत की सजा नहीं देता।"
उन्होंने कहा, "मेरे मुवक्किल का इस घटना में मारे गए 54 लोगों के खिलाफ कोई निजी ईष्र्या नहीं थी। उन्हें गुमराह किया गया था।"
बाद में पत्रकारों से चर्चा में निकम ने कहा, "दोषियों ने गेटवे ऑफ इंडिया और महालक्ष्मी मंदिर पर धमाका करके विदेशी सैलानियों को निशाना बनाने का प्रयास किया था लेकिन उनकी गाड़ी में आई खराबी के चलते उन्होंने झावेरी बाजार में धमाका कर दिया।"
उन्होंने कहा कि विशेष अदालत ने इस मामले में सजा सुनाने की तारीख टाल दी है। अब इन दोषियों को गुरुवार को सजा सुनाई जाएगी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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