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न्यायधीश सम्पत्ति विधेयक टला

Veerappa Moily
नई दिल्ली। हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के जजों की संपत्ति की जानकारी देने संबंधी विवादास्पद विधेयक सोमवार को संसद में पेश नहीं हो पाया। विपक्ष के भारी हंगामे के कारण सरकार ने इसे टाल दिया। विपक्ष ने धारा-6 पर कड़ी आपत्ति करते हुए इसे विधेयक से हटाने की मांग की।

कानून एवं न्यायमंत्री वीरप्पा मोइली ने सोमवार को सदन में जैसे ही 'न्यायाधीश सम्पत्ति और दायित्व की घोषणा विधेयक-2009" को पेश करने की कोशिश की विपक्ष के नेता अरुण जेटली की अगुवाई में पूरे विपक्ष ने इसपर भारी आपत्ति जताई। जिसके कारण मोइली ने विधेयक पेश नहीं करने की घोषणा कर दी।

सार्वजनिक नहीं होगा ब्यौरा

इस विधेयक में प्रावधान है कि न्यायाधीश अपनी सम्पत्तियों के बारे में किसी सक्षम अधिकारी के समक्ष ब्यौरा पेश करेंगे। लेकिन कुछ निश्चित मामलों को छोड़कर इसे उजागर नहीं किया जाएगा। अगर कोई न्यायाधीश आपराधिक मामलों में शामिल पाया जाता है तब इस संबंध में सूचनायें उपलब्ध हो सकती हैं।

विपक्ष के नेता जेटली ने सम्पत्ति की घोषणा को सार्वजनिक न करने संबंधी विधेयक की धारा-6 पर कड़ी आपत्ति जताई। जेटली के अनुसार चुनाव लड़ने वाला प्रत्येक उम्मीदवार अपनी सम्पत्ति की घोषणा करता है जिसे सार्वजनिक भी किया जाता है, तो न्यायाधीशों के बारे में ऐसा क्यों नहीं हो सकता।

धारा-6 हटाने की मांग

उन्होंने कहा कि देश में सूचना अधिकार कानून है और इसके तहत यह जानकारी सार्वजनिक की जाती है लेकिन न्यायाधीशों के लिए अपनी सम्पत्ति की जानकारी सार्वजनिक नहीं करने की अनुमति दी गई है, जो भेदभावपूर्ण है। जेटली ने कहा कि यह विधेयक पेश करने से पहले इसकी धारा-6 को हटा लिया जाना चाहिए।

मार्क्सवादी सदस्य वृन्दा कारत ने कहा कि कानून के सामने सभी नागरिक एक समान हैं अतः न्यायाधीशों को छूट देने संबंधी प्रावधान अनुचित है।

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