देश मे स्वाइन फ्लू से मौत का पहला मामला सामने आया (लीड-1)
स्वास्थ्य अधिकारियों ने यहां कहा कि इनफ्लुएंजा ए (एच1एन1) से पीड़ित छात्रा की हालत बिगड़ने के बाद उसे जीवन रक्षक यंत्र पर रखा गया था। सोमवार को उसकी मौत हो गई।
बताया गया है कि फ्लू के लक्षण से ग्रस्त इस छात्रा ने पहले 21 जुलाई को एक सामान्य चिकित्सक से संपर्क किया था। स्थिति में सुधार होने के बाद वह 23 जुलाई से स्कूल जाने लगी थी।
स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से जारी एक बयान के अनुसार, "25 जुलाई को उसे फिर बुखार हुआ। उसके बाद उसने एक अन्य निजी चिकित्सक से संपर्क किया। लेकिन उसका बुखार बना रहा और 27 जुलाई को उसे पुणे के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया।"
बयान में कहा गया है कि लड़की की हालत बिगड़ गई और उसके बाद उसे गहन चिकित्सा कक्ष (आईसीयू) में स्थानांतरित कर दिया गया, उसे 29 जुलाई को जीवन रक्षक यंत्र पर रखा गया। उसके फेफड़े की वायु को जांच के लिए 31 जुलाई को राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान (एनआईवी) भेजा गया और उसमें फ्लू के वायरस की पुष्टि हुई।
बयान में कहा गया है कि 30 जुलाई को उसे टैमीफ्लू की खुराक दी गई। लेकिन उसकी हालत दोबारा बिगड़ गई और तीन अगस्त की शाम छात्रा का निधन हो गया।
स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से कहा गया है कि छात्रा का इलाज करने वाले तीन चिकित्सकों और एक नर्स में सांस की समस्या पैदा हो गई है और उन्हें ओसेल्टामिवीर की खुराक दी जा रही है।
देश में अब तक फ्लू के 500 से अधिक मामले सामने आ चुके हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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