बुंदेलखंड के मुद्दे पर संसद के दोनों सदनों में भारी हंगामा (लीड-1)

सुबह 11 बजे जैसे ही लोकसभा की कार्यवाही शुरू हुई भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और समाजवादी पार्टी (सपा) के सदस्यों ने बुंदेलखंड के लिए विकास प्राधिकरण के गठन का मुद्दा उठाया। सदस्यों का कहना था कि राज्य सरकार को विश्वास में लिए बगैर केंद्र सरकार पृथक बुंदेलखंड विकास प्राधिकरण का गठन नहीं कर सकती है।

राज्यसभा में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के सतीशचंद्र मिश्रा ने यह मुद्दा उठाया। इसके बाद बसपा और भाजपा के सदस्यों ने इस मसले पर हंगामा आरंभ कर दिया। जिसके चलते सदन की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक स्थगित कर दी गई। इसके बाद सदन की कार्यवाही आरंभ होते ही सदस्यों ने फिर से इस मसले पर हंगामा आरंभ कर दिया। भाजपा और बसपा के सदस्य सरकार विरोधी नारे लगाने लगे।

इस बीच उपसभापति के. रहमान खान ने सदस्यों से कहा कि उन्हें बुंदेलखंड के मसले पर सदस्यों के नोटिस मिल हैं और वह उन्हें बोलने का मौका देंगे। बसपा के सतीशचंद्र मिश्रा ने कहा कि बुंदेलखंड के विकास के लिए उत्तर प्रदेश सरकार केंद्र से लगातार आर्थिक पैकेज की मांग कर रही है लेकिन केंद्र सरकार इस मांग को लगातार नजरअंदाज कर रही है।

उन्होंने कहा, "अमेठी व रायबरेली की तर्ज पर यदि बुंदेलखंड में भी विकास कार्य किए जाए तो वहां का विकास हो सकता है।"

इस मसले पर भाजपा के प्रभात झा ने कहा, "पृथक विकास प्राधिकरण थोपे जाने से देश के संघीय ढांचे को नुकसान पहुंचेगा। यह पूरी तरह संविधान के खिलाफ है। केंद्र सरकार से हमने इस क्षेत्र के विकास के लिए 2600 करोड़ रुपये की मांग की है लेकिन केंद्र सरकार एक पैसा नहीं दे रही है।"

भाजपा के ही कलराज मिश्र ने कहा कि बुंदेलखंड के लिए पृथक विकास प्राधिकरण गठित करने का केंद्र सरकार का कदम राजनीति से प्रेरित है।

सरकार की तरफ से हस्तक्षेप करते हुए प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने सदन को आश्वस्त किया कि देश के संघीय ढांचे में नुकसान पहुंचाने का सरकार का कोई इरादा नहीं है।

उधर, इसी मसले पर लोकसभा में भी जोरदार हंगामा हुआ। प्रश्नकाल आरंभ होते ही बसपा और भाजपा के सदस्यों ने हंगामा आरंभ कर दिया जिसके चलते लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने सदन की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक स्थगित कर दी।

इसके बाद कृष्णा-गोदावरी बेसिन से उत्पादित गैस के बंटवारे को लेकर जारी विवाद पर पेट्रोलियम मंत्री मुरली देवड़ा के स्पष्टीकरण पर हंगामे के कारण लोकसभा की कार्यवाही पहले दो बजे तक और फिर इसके बाद तीन बजे तक स्थगित हुई।

तीन बजे जब सदन की कार्यवाही आरंभ हुई तो उपाध्यक्ष करिया मुंडा ने महंगाई पर चर्चा की शुरुआत करने के लिए वासुदेव आचार्य का नाम पुकारा। आचार्य अपनी जगह पर खड़े हुए ही थे कि तृणमूल कांग्रेस के सदस्य अध्यक्ष के आसन के समीप आ गए और पश्चिम बंगाल में कानून-व्यवस्था की स्थिति को लेकर हंगामा करने लगे। इस पर मुंडा ने तृणमूल के सुदीप बंदोपाध्याय को बोलने की इजाजत दी। बंदोपाध्याय ने पश्चिम बंगाल में कानून-व्यवस्था की स्थिति का हवाला देते हुए वहां राष्ट्रपति शासन लगाए जाने की मांग की। इस पर माकपा सदस्य यह कहकर तृणमूल कांग्रेस का विरोध करने लगे कि यह राज्य का मसला है और इसे इस सदन में नहीं उठाया जा सकता।

बंदोपाध्याय की बात खत्म होते ही बसपा सदस्य बुंदेलखंड के मसले पर केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी करने लगे। बसपा सदस्य इस मसले पर सरकार से जवाब मांग रहे थे, लेकिन जब सरकार की तरफ से कोई जवाब नहीं आया तो वे अध्यक्ष के आसन के समीप जाकर नारेबाजी करने लगे। हंगामा न थमता देख उपाध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही दिन भर के लिए स्थगित कर दी।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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